*रात के अंधेरे में लकड़ी की बेखौफ ढुलाई,,,,,हर तरफ काटे जा रहे वर्षों पुराने प्रतिबंधित वृक्ष,,प्रशासन की आँख बंद क्यों,,आखिर संरक्षण किसका जिम्मेदार कौन ,,,तय करेगा कौन*
सवाल एक ही आखिर इन लोगों को संरक्षण किसका,,,एक तरफ लाखों पौधे रोपित किए जा रहे दूसरी तरफ प्रतिदिन कटाई बदस्तूर जारी है

बालोद । बालोद जिला मुख्यालय में रात के अंधेरा का फायदा उठाकर रात्रि 2 बजे से लेकर 4 बजे के बीच राजनांदगांव मुख्यमार्ग और बघमरा पड़कीभाट की तरफ से प्रतिबंधित वृक्ष की कटाई कर बकायदा धर्मकांटा से वजन कराकर बालोद सहित आसपास के कुछ आरा मिलो में इसे उतारा जाता है इन सबके बाद भी प्रशासन में बैठे अधिकारी मस्त नींद में रहते हैं जबकि पर्यावरण को दिनों दिन लालच में आकर नुकसान पहुंचाया जा रहा है एक तरफ बालोद कलेक्टर दिव्या मिश्रा के नेतृत्व में 20 जुलाई 2025 को पूरे जिले में लाखों पौधे लगाए गए वहीं दूसरी तरफ उसी जिला में वृक्षों की अंधाधुंध कटाई अपने चरम सीमा पर है सूत्रों की माने तो नेताओ जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों से संरक्षण प्राप्त लोग ऊंची पहुंच का दम भरकर इन कामों को अंजाम दे रहे हैं लोगो का कहना है कि अगर यह काटे गए वृक्षों का विभागीय परमिशन है तो रात के अंधेरे में चुपचाप लाने को क्या समझा जाए एक तरफ प्रशासन पौधे रोपित कर रही है तो दूसरी तरफ बेधड़क वृक्षों की कटाई चल रही है अब देखना यह होगा कि रात के अंधेरे में प्रशासन कितना गस्त करती है या खबर मिलते ही कुछ दिनों के लिए ट्रैक्टर के पहिये थमते हैं खैर बात जो भी हो खेतों के मेड से वर्षों पुराने अर्जुन कहूवा जैसे वृक्षों की कटाई बिना किसी अनुमति के हो रही है कटाई के बाद ठूंठ को छुपाने मुरूम या पैरा डाल दिया जाता है बालोद से राजनांदगांव मुख्यमार्ग से लगे खेतों में तो यह धड्डले से हो रहा अंदाजा लगा लीजिए कि मुख्यमार्ग से अंदर के खेतों में क्या हाल हुआ होगा ना पंचायत से अनुमति ना ही पटवारियों या सक्षम अधिकारियों से अनुमति मिली है फिर भी किसके संरक्षण में वृक्षों की बेखौफ कटाई जारी है यह जांच का विषय बना हुआ है




