छत्तीसगढ़टॉप न्यूज़

*पिता की हर पुण्यतिथि पर ये बेटिया करती है सेवा का कार्य,,,,पिता की प्रेरणा से सामाजिक सेवा का अनूठा उदाहरण पेश करती बेटियां*

बालोद ।  सेवानिवृत्त शिक्षक स्व. एल पी यादव की तीन बेटियों ने अपने पिता की याद में मूकबधिर एवं दिव्यांग बच्चों के साथ न्योता भोज कर पुण्यतिथि मनाया स्व एलपी यादव जो एक शिक्षक के साथ ही शहर में उनकी पहचान एक मृदुभाषी व्यक्ति के रूप में थी शहर के हर वर्ग के लोग उनसे स्नेह और आद्र करते थे उनकी तीन पुत्रियां जो कि आज शिक्षा विभाग बालोद में पदस्थ हैं और अपने पिता को ही अपनी प्रेरणास्रोत मानती हैं | प्रति वर्ष उनकी स्मृति में उनकी बेटियों द्वारा हर वर्ष विभिन्न सेवा का कार्य किया जाता है | इसी कड़ी में इस वर्ष घरौंदा आश्रय गृह बालक एवं बालिका बालोद एवं सिवनी और मूक बधिर शाला उमरादाह में विशेष आवश्यकता वाले बच्चों को भोजन कराया एवं जरूरत की सामग्री का वितरण भी किया वहीं उनकी तीनों बेटियों ने इस पुण्यतिथि के अवसर पर दिव्यांग बच्चों के लिए यथासंभव सहयोग करने की बात कही है उन्होंने घरौंदा गृह एवं मूक बधिर शाला के समिति सदस्यों की सराहना करते हुए उनके सेवा भाव की सराहना करते हुए कहा कि सही मायने में ऐसे बच्चो की देखभाल और लालनपालन बहुत कठिन होता है, ऐसे में इनका प्रयास बहुत ही सराहनीय है,उन्होंने सभी से अपील भी किया है कि इन बच्चों के साथ समय बिताएं, इनको सिर्फ हमारा स्नेह चाहिए ये बच्चे छोटी छोटी चीजों से अत्यंत खुश हो जाते हैं |पिता जी के बताये मार्ग पर चलते हुए प्रतिवर्ष कुछ न कुछ अलग करने हेतु संकल्पि हैं ये बेटियाँ, इनका मानना है कि ये जो भी हैं आज सिर्फ अपने पिता की वजह से है,
*शिक्षा के लिए एक क्रांतिकारी पिता ,जिन्होंने 1980 में सब के विरुद्ध जा कर अपनी बेटियों को शिक्षा प्रदान किया जिसका उदाहरण जिले में उनकी दोनों प्राचार्य बेटियां हैं*
सब के विरोध के बाद भी उन्होंने दोनों को आदर्श बालक स्कूल में पढ़ाया ,उस समय बहुत कम ही बालिका पढाई करती और संख्या गिनी चुनी ही थी और उन्हें जिला के एक मात्र आदर्श बालक स्कूल में गणित संकाय में मैट्रिक की पढ़ाई के लिए विशेष अनुमति से अपनी बच्चियों को पढ़ाने का साहस किया, जिससे अन्य बालिकाओं को भी लाभ प्राप्त हुआ, इनके बैच में केवल 2,3 ही बालिका रही पुरी क्लास में लड़कों के साथ पढ़ना था,वह समय बहुत सी मान्यताओं से भरा हुआ समय था जहां बालिका शिक्षा भी बहुत ही मुश्किल था उस समय मे आप ने शिक्षा के महत्व को समझते हुए अपनी बेटियों को पढ़ाया ,, आज इसलिए उनकी बेटियाँ पूरा श्रेय उनको ही देती हैं |
उस समय मे वो अपनी बेटियों की शिक्षा के लिए संकल्पित थे और साथ मे सभी की शिक्षा के लिए बहुत योगदान रहा है उनका,उनके विद्यार्थी आज भी उनको याद करते हैं ,वे आज भी सभी के स्मृति पटल पर हैं और सदा रहेंगें……
*प्रथम पुण्यस्मृति से दसवीं पुण्यस्मृति तक किये गए कार्य*
1 जिला स्तर पर बोर्ड परीक्षा में प्रथम एवं द्वितीय स्थान प्राप्त करने वाले बच्चो का सहयोग राशि प्रशस्ति पत्र देकर सम्मान
2 अमलीडीही स्कुल में स्वेटर दान
3 वृद्धाआश्रम दुर्ग में अनाज का दान
4 प्राथमिक शाला कलकसा एवं प्राथमिक शाला दुधली स्कुल में जूता मोजा वितरण
5 प्राथमिक शाला बड़गाँव में स्कुल बैग का वितरण
6 हायर सेकेंडरी स्कूल दुधली में टिफिन वितरण,प्राथमिक शाला बनगाँव में जूता मोजा वितरण
7 दिव्यांग संस्थान राजिम में कपड़ा वितरण
8 वृद्धाश्रम में साड़ी,कम्बल एवं शाल वितरण
9 दुधली संकुल में संकुल के अंतर्गत आने वाले सभी स्कुल में संकुल स्तरीय न्यौता भोज,,
सेजेस कन्नेवाडा में न्यौता भोज
10 धरौंदा आश्रय स्थल बालोद में कूलर दान
11.बालोद की समस्त सफाई दीदीयों का सम्मान
प्रत्येक वर्ष ऐसा आयोजन करते रहने की बात कही गई हैं ग्यारहवीं पुण्यस्मृति के
इस सम्पूर्ण आयोजन में मुख्य रूप से सुलोचना यादव,तेजेन्द्र यादव,दुर्गेशनंदिनी यादव विनोदनी यादव कादंबिनी यादव, प्रांशु यादव,साक्षी यादव,आदित्य यादव, उमेश निषाद सहभागी रहें,,इसके लिए परिवारजनों ने हर्ष व्यक्त करते हुए शुभकामनाएं दी हैं |

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
error: Content is protected !!