
सीधी चुनौती: GeM का बहाना और पूर्ववर्तियों का रोना छोड़ें, टेबल पर बैठ सार्वजनिक बहस करें CMO
CMO खुद को बचाने के लिए GeM पोर्टल और पूर्व अधिकारियों के नाम की आड़ लेना बंद करें और जनता के सामने आकर उनके सीधे सवालों का जवाब दें।
चुनौती 1: GeM पर कैटेगरी नहीं थी तो कस्टम बिड और राज्य ई-टेंडरिंग से किसने रोका था? सीएमओ का यह कहना कि GeM पर कैटेगरी नहीं बता रहा था पूरी तरह भ्रामक है।
भारत सरकार के प्रोक्योरमेंट नियमों के तहत यदि किसी वस्तु की सीधी श्रेणी न मिले, तो GeM पर कस्टम बिड अथवा बीओक्यू बिड के जरिए राष्ट्रीय स्तर पर पारदर्शी टेंडर निकालने का स्पष्ट कानूनी प्रावधान है।
इसके अलावा छत्तीसगढ़ शासन के अपने ई-प्रोक्योरमेंट पोर्टल पर ऑनलाइन टेंडर क्यों नहीं लगाया गया? 5 लाख से अधिक के कार्य में स्थानीय स्तर पर मैनुअल टेंडर लगाकर किसको लाभ पहुंचाने का मंच तैयार किया गया?
सीएमओ अगर खुद को इतना ही पाक-साफ और पारदर्शी मानते हैं, तो वे परिषद और शहर की जनता के सामने आकर स्टीमेट के एक-एक बिंदु का तकनीकी औचित्य सिद्ध करें।




