शोपीस’ सभापति का फूटा दर्द: साहब! हम भी नगर पालिका में हैं, हमें भी पानी-वानी पूछ लिया करो!

बालोद। कहते हैं राजनीति में कुर्सी का बड़ा महत्व होता है, लेकिन हमारे नगर पालिका के एक विभाग में एक ऐसी ‘दिव्य कुर्सी’ है, जिस पर बैठने वाले को खुद नहीं पता होता कि उनके विभाग में क्या चल रहा है।
जी हां, हम बात कर रहे हैं BALOD नगर पालिका के माननीय सभापति महोदय की। बेचारे नाम के तो ‘कप्तान’ हैं, लेकिन टीम मैच कहां खेल रही है और बैट-बॉल कहां से खरीदा जा रहा है, इसकी भनक तक उन्हें नहीं है।
इस घोर उपेक्षा से आहत होकर आदरणीय सभापति जी का दिल आखिरकार बैठ गया। उन्होंने भारी मन और नम आंखों के साथ ‘साहेब’ के दरबार में एक अर्जी लगाई है। अर्जी क्या है, मानो एक रूठे हुए साथी का प्रेम पत्र है, जिसमें लिखा है— “साहेब, कभी हमसे भी विभाग की दो-चार बातें कर लिया करो!”
जनता सोच रही थी कि सभापति जी के हाथ में ‘कमांड’ है, पर यहां तो सभापति जी खुद ‘डिमांड’ लेटर लेकर घूम रहे हैं कि “हुजूर, थोड़ी जानकारी हमें भी दे दो!”
अब देखना दिलचस्प होगा कि ‘साहेब’ इस ‘आहत दिल’ पर जानकारी का मरहम लगाते हैं, या फिर इस आवेदन को डस्टबिन में डाल देते हैं।


