बालोद। नगर पालिका परिषद बालोद में प्लेसमेंट श्रमिकों की नियुक्ति को लेकर एक बार फिर प्रशासनिक निर्णयों पर सवाल उठने लगे हैं। परिषद की सामान्य सभा में 16 दिसंबर 2025 को यह निर्णय लिया गया था कि वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए प्लेसमेंट श्रमिकों के नियोजन हेतु नई एजेंसी नियुक्त करने के लिए नए टेंडर आमंत्रित किए जाएंगे। परिषद के इस फैसले को पारदर्शिता और प्रतिस्पर्धात्मक प्रक्रिया की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा था।
बैठक में यह तर्क दिया गया था कि नए टेंडर जारी होने से विभिन्न एजेंसियों को अवसर मिलेगा, प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी और निकाय को नई दरों के अनुसार आर्थिक लाभ प्राप्त होगा। साथ ही कार्यप्रणाली में पारदर्शिता भी सुनिश्चित हो सकेगी।
लेकिन अब प्रशासनिक सूत्रों से मिल रही जानकारी ने पूरे मामले को संदेह के घेरे में ला दिया है। बताया जा रहा है कि नए टेंडर की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के बजाय पुराने ठेके को ही एक्सटेंशन देने की तैयारी की जा रही है। इस संबंध में PIC (प्रेसिडेंट इन काउंसिल) स्तर पर नया प्रस्ताव लाए जाने की चर्चा है।
इस घटनाक्रम के बाद कई सवाल खड़े हो रहे हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब परिषद ने पहले ही नए टेंडर जारी करने का निर्णय ले लिया था, तो आखिर उस निर्णय को अमल में क्यों नहीं लाया गया? क्या नए टेंडर बुलाने में कोई तकनीकी बाधा थी या फिर जानबूझकर देरी की गई ताकि बाद में “आपातकालीन परिस्थिति” का हवाला देकर पुराने ठेके को ही आगे बढ़ाया जा सके?
जानकारों का कहना है कि किसी भी कार्य या सेवा अनुबंध की एक निश्चित समय-सीमा होती है और बिना पर्याप्त वित्तीय एवं तकनीकी औचित्य के बार-बार एक्सटेंशन देना नियमों की भावना के विपरीत माना जाता है। ऐसे मामलों में सक्षम तकनीकी अधिकारियों की अनुशंसा, वित्तीय स्वीकृति और प्रशासनिक अनुमति आवश्यक होती है।
अब सवाल यह भी उठ रहा है कि क्या पुराने टेंडर की अवधि बढ़ाने के लिए संबंधित विभाग के सक्षम अधिकारियों से विधिवत वित्तीय एवं प्रशासनिक अनुमति ली गई है? यदि नहीं, तो यह प्रक्रिया भविष्य में विवाद और जांच का विषय बन सकती है।
नगर पालिका की कार्यप्रणाली को लेकर विपक्षी पार्षदों और स्थानीय लोगों में भी चर्चा तेज हो गई है। लोगों का कहना है कि यदि परिषद के निर्णयों को ही बाद में बदलना था, तो सामान्य सभा में नए टेंडर का प्रस्ताव पारित करने की आवश्यकता क्या थी?
फिलहाल पूरे मामले पर नगर पालिका प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है, लेकिन पुराने ठेके को एक्सटेंशन देने की चर्चाओं ने निकाय की वित्तीय पारदर्शिता और निर्णय प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।