
नगर पालिका में ‘टुकड़ा भुगतान’ का बड़ा खेल: ₹25 लाख की स्वीकृति के बाद भी बिना टेंडर बांट दिए ₹5 लाख के बिल!
पीआईसी से टेंडर आमंत्रण की हरी झंडी मिलने और ₹25.00 लाख की भारी-भरकम वित्तीय व प्रशासकीय स्वीकृति जारी होने के बावजूद, जिम्मेदार अधिकारियों ने टेंडर प्रक्रिया का गला घोंट दिया।
वित्तीय वर्ष 2025-26 के मात्र 10 महीनों के भीतर फ्लैक्स, बैनर एवं अन्य छपाई के नाम पर करीब ₹5 लाख का भुगतान चहेतों को कर दिया गया, वह भी बिना कोई ओपन टेंडर कराए।
नियमों के मुताबिक, एक निश्चित सीमा से अधिक के काम के लिए पारदर्शी टेंडर प्रक्रिया अपनाना अनिवार्य है। लेकिन नगर पालिका के इस खेल में टेंडर से बचने के लिए पूरे काम को छोटे-छोटे बिलों में तोड़ दिया गया। 10 महीने तक लगातार टुकड़ों में करीब ₹5 लाख का भुगतान करना यह साफ दर्शाता है कि चहेती एजेंसी या फर्म को सीधे फायदा पहुंचाने के लिए जानबूझकर टेंडर नहीं निकाला गया।


