
आस्था पर प्रशासन की कालिख: बप्पा की विदाई सिर पर, कुंभकर्णी नींद में सो रही बालोद पालिका
बालोद, 24 सितंबर। बालोद में भक्ति और श्रद्धा का मखौल उड़ाने की पूरी तैयारी हो चुकी है। 25 सितंबर को अनंत चतुर्दशी है और 28 सितंबर को बड़े पंडालों की भव्य झांकियां निकलने वाली हैं, लेकिन नगर पालिका के लापरवाह जिम्मेदार गहरी नींद में खर्राटे भर रहे हैं। जिस तालाब में भगवान गणेश की प्रतिमाओं को पूरे आदर और पवित्रता के साथ विसर्जित किया जाना चाहिए, वह आज बदबूदार कचरे का डंपिंग यार्ड बना पड़ा है।
शहर के प्रमुख गंगासागर तालाब के विसर्जन कुंड की हालत देखकर किसी का भी खून खौल जाए। चारों तरफ प्लास्टिक, कचरे के ढेर और सड़ांध मारती जलकुंभी का साम्राज्य है। यही हाल दशहरा तालाब, बुढ़ापारा और कुंदरूपारा तालाबों का भी है, जहां प्रशासन की बेरुखी साफ नजर आ रही है।
विसर्जन की तारीखें अचानक आसमान से नहीं टपकी थीं, यह महीनों से तय थीं। फिर भी न तो घाटों की सुध ली गई, न सुरक्षा के लिए मजबूत बैरिकेडिंग लगी और न ही रोशनी का कोई पुख्ता इंतजाम दिखा। जब सवाल उठे, तो सीएमओ अधिकारी ने रटा-रटाया बयान थमा दिया कि गुरुवार से सफाई शुरू होगी। सवाल उठता है कि क्या अंतिम 24-48 घंटों की लीपापोती से हफ्तों की गंदगी साफ हो जाएगी?
विसर्जन के दिन हजारों श्रद्धालुओं का हुजूम उमड़ेगा, गाड़ियों का जाम लगेगा और हुड़दंगियों का खतरा रहेगा। ऐसे में बिना तैयारी, बदहाल तालाबों के किनारे श्रद्धालुओं को धकेलना किसी बड़े हादसे को सीधा न्योता देना नहीं तो और क्या है? आस्था के नाम पर सिर्फ औपचारिकता निभाने वाली बालोद नगर पालिका को यह जवाब देना होगा कि आखिर उसकी यह आपराधिक लापरवाही कब तक चलेगी।




