
समय—सुबह के ठीक 11 बजे।
लोकेशन—ट्रांसपोर्ट नगर के पास स्थित कचरा डंप साइट।
मौके पर मौजूदगी—नगर पालिका के तत्कालीन सीएमओ और उनका तयशुदा खास ठेकेदार।
उस दिन ट्रांसपोर्ट नगर की उसी बदबूदार डंप साइट पर खड़े होकर बाकायदा मुआयना हुआ, उंगलियों से इशारे हुए और तय हुआ कि इसी उबड़-खाबड़ जमीन का कायाकल्प कर DMF की राशि से क्रिकेट बॉक्स बनाया जाएगा।
बाकायदा इसी साइट के नाम पर 1440 वर्ग मीटर कचरा सफाई और 1008 क्यूबिक मीटर मिट्टी-मुरूम के भराव का 7.28 लाख का समतलीकरण एस्टीमेट बना। डीएमएफ से 28.74 लाख की वित्तीय मंजूरी मिली, टेंडर हुआ और फाइल वर्क ऑर्डर तक पहुंच गई।
लेकिन आज जब धरातल पर काम शुरू होने की बारी आई, तो पूरी स्क्रिप्ट ही पलट दी गई। डंप साइट के नाम पर निकली फाइल ने अचानक मोड़ लिया और सीधे सरदार पटेल मैदान के सीने पर आकर चूने की लकीरें खींच दी गईं।
अब शहर की जुबान पर सबसे बड़ा और चुभता हुआ सवाल यही तैर रहा है: जब फंड डंप साइट का, काम डंप साइट का और वर्क ऑर्डर डंप साइट का… तो फिर शहर के एकमात्र खुले सरदार पटेल मैदान की बलि क्यों?




