
नगर पालिका की ये 24 करोड़ 25 लाख रुपये की जल आवर्धन योजना का वो जनाजा है, जिसे नगर पालिका के अफ़सर,कर्मचारी,और कुर्सी पर बैठे जिम्मेदार मिलकर निकाल रहे है। नलों में कभी सुबह तो कभी शाम, और कई बार दोनों वक्त गंदा पानी आ रहा है।
फिल्टर प्लांट पर महज 5 से 6
महीने पहले ही DMF मद से 50 से 60 लाख रुपये पानी की तरह बहाए गए। लेकिन जमीनी हकीकत जस की तस है।
जनस्वास्थ्य से जुड़ी इस अत्यंत संवेदनशील योजना का संचालन महज कागजों में तकनीकी विशेषज्ञों के हाथ में है। पूरे फिल्टर प्लांट और जलापूर्ति व्यवस्था की बागडोर अप्रशिक्षित प्लेसमेंट कर्मचारियों के भरोसे छोड़ दी गई है ।
नगर पालिका प्रशासन और कुर्सी पर बैठे जिम्मेदारों की न तो कोई नियमित मॉनिटरिंग है और न ही पानी की गुणवत्ता की पुख्ता जांच। एक तरफ जहां लोग गंदे पानी से परेशान हैं, वहीं शहर के कई वार्डों में पर्याप्त मात्रा में पानी तक नहीं पहुंच पा रहा है।
शहर की जनता को साफ स्वच्छ और पर्याप्त पेयजल की आपूर्ति सुनिश्चित करने में स्थानीय निकाय पूरी तरह फैल हो चुकी है ।।




