कागजों पर ‘विवादमुक्त’ जमीन, आरटीआई मांगी तो ‘गायब’ सरकारी रिकॉर्ड!

बालोद। नगरीय प्रशासन का एक स्पष्ट और कड़ा नियम है—निर्माण कार्य केवल उसी भूमि पर होगा जो निकाय के आधिपत्य में हो। किसी भी निजी या विवादित जमीन पर सरकारी पैसा नहीं बहाया जाएगा।
जब एक जागरूक नागरिक ने RTI के तहत प्रक्रियाधीन निविदा के कार्यवार कार्य स्थल का खसरा, निकाय आधिपत्य और भूमि स्वामित्व की जानकारी मांगी, तो जवाब मिला: वांछित जानकारी संधारित नस्ती, अभिलेख में विद्यमान नहीं है।
बिना खसरा नंबर और बिना स्वामित्व के करोड़ों के टेंडर प्रक्रियाधीन हैं। जब आदेश है कि भूमि विवादमुक्त होनी चाहिए, तो बिना मालिकाना हक जांचे कार्य स्वीकृत कैसे हो गए?
अगर रिकॉर्ड ‘विद्यमान’ नहीं है, तो क्या यह माना जाए कि सरकारी निर्माण बिना किसी वैधानिक दस्तावेज के, यानी सीधे तौर पर ‘अवैध’ तरीके से किया जा रहा है?
खैर, एक ही निर्माण कार्य के लिए दो बार तकनीकी स्वीकृति और दो बार प्रशासकीय स्वीकृति जारी करने वालो से उम्मीद भी क्या की जा सकती है।

