प्रतिस्पर्धी टेंडर प्रक्रिया के लिए न्यूनतम तीन बोलीदाताओं की आवश्यकता है, न कि ‘साहेब’ के विवेक की
ताजा मामले में बालोद नगर पालिका द्वारा पर्याप्त प्रतिस्पर्धा के अभाव में केवल दो ही निविदाओं (Bids) के आधार पर तकरीबन 10 टेंडर खोल दिए जाने का मामला सामने आया है।
इस कदम से न केवल सरकारी नियमों का उल्लंघन हुआ है, बल्कि इसमें भ्रष्टाचार और “रिंग गेम” की भी आशंका जताई जा रही है।
सार्वजनिक खरीद के नियमों के अनुसार, टेंडर प्रक्रिया में प्रतिस्पर्धा सुनिश्चित करना अनिवार्य है ताकि जनता के पैसे का सही मूल्य मिल सके।
‘जनरल फाइनेंशियल रूल्स’ या राज्य के भंडार क्रय नियमों के अनुसार, न्यूनतम प्रतिस्पर्धी बोलियों की संख्या (आमतौर पर कम से कम तीन) अनिवार्य होती है।
यदि केवल एक या दो ही निविदाएं प्राप्त हुई थीं, तो नियमों के तहत टेंडर को दोबारा आमंत्रित किया जाना चाहिए। बालोद नगर पालिका के अधिकारियों से इस प्रक्रिया पर लिखित स्पष्टीकरण मांगा जाना चाहिए और इसकी जांच भी होनी चाहिए
ज्ञात हो की बालोद नगर पालिका मे करोडो के विकास कार्यो हेतु शासन से स्वीकृति पश्चात टेंडर प्रक्रिया का विवाद शहर मे चर्चा का विषय बन गया है कुछ ठेकेदार तो जनप्रतिनिधियों की मनमानी और अफसर शाही का हवाला दे रहे हैँ टेंडर फ़ार्म लेने से खोलने तक यह टेंडर विवादों मे घिरता जा रहा है ठेकेदारो और जनप्रतिनिधियों के बिच यह टेंडर समस्या मे पड़ता नजर आ रहा है आखिर इस समस्या का क्या हल होगा ये भी देखना बाकी है सूत्रों से मिली जानकारी अनुसार क्योंकि नगर विकास मे यह टेंडर प्रक्रिया और नियम रिंग गेम आड़े आता है तो कुछ पार्षद इसकी शिकायत उच्च स्तरीय करने का मन बना लिए हैँ


