सुशासन की सरकार में ‘जुगाड़’ का प्रशासन: क्या दोषियों को बचाने के लिए निरस्त की गई निविदा?”
बालोद – एक ही कार्य के लिए दो अलग-अलग एस्टीमेट तैयार किया जाना न केवल नियमों के विरुद्ध है, बल्कि यह वित्तीय गड़बड़ी और भ्रष्टाचार की स्पष्ट आशंका पैदा करता है।
नियमों के अनुसार, किसी भी कार्य का एक ही तकनीकी एस्टीमेट (TS) और प्रशासनिक स्वीकृति (AS) होनी चाहिए। दो अलग एस्टीमेट किस आधार पर बनाए गए?
क्या एक ही कार्य की लागत को बढ़ाकर दिखाने के लिए दूसरा एस्टीमेट तैयार किया गया? दोनों एस्टीमेट की दरों (Rates) और मात्रा (Quantity) में क्या अंतर है?
क्या यह एक ही कार्य के नाम पर दो बार राशि निकालने (Double Billing) की साजिश है? किस अधिकारी ने इन दोनों एस्टीमेट्स पर हस्ताक्षर किए हैं?
एस्टीमेट में अंतर क्यों? एक ही काम के दो अलग-अलग एस्टीमेट बनाना कोई मानवीय भूल नहीं, बल्कि वित्तीय धोखाधड़ी का प्रयास है।
जब किसी बड़ी गड़बड़ी को छिपाना होता है, तो अक्सर ‘तकनीकी त्रुटि’ का हवाला देकर टेंडर निरस्त कर दिया जाता है ताकि कोई कानूनी फंदा न फंसे। यह सिर्फ एक निरस्तीकरण नहीं, बल्कि मिलीभगत पर पर्दा डालने की कोशिश है।



