वार्ड 07 में एक ही काम के लिए दो बार टेंडर, फिर निरस्त — प्रशासनिक प्रक्रिया पर उठे सवाल
लाखों के ‘सीसी टॉप कोट’ कार्य में गड़बड़ी की आशंका, टेंडर प्रक्रिया पर स्थानीय स्तर पर चर्चा तेज
वार्ड क्रमांक 07 में एक ही निर्माण कार्य को लेकर प्रशासन की कार्यप्रणाली सवालों के घेरे में आ गई है। प्राप्त दस्तावेजों के अनुसार “सीसी टॉप कोट” से जुड़े इस कार्य के लिए पहले निविदा जारी की गई थी, लेकिन इसके कुछ समय बाद उसी कार्य के लिए दोबारा नई निविदा प्रकाशित की गई।
मामला यहीं नहीं थमा—अंततः उक्त कार्य के टेंडर को निरस्त कर दिया गया। इस पूरी प्रक्रिया ने पारदर्शिता और प्रशासनिक जवाबदेही पर गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं।
जानकारी के मुताबिक, यह कार्य लाखों रुपये की लागत से संबंधित है। ऐसे में एक ही कार्य के लिए दो बार निविदा जारी करना और फिर उसे रद्द कर देना न केवल प्रक्रियात्मक विसंगति दर्शाता है, बल्कि संभावित अनियमितताओं की ओर भी संकेत करता है।
स्थानीय स्तर पर चर्चाएं तेज हैं कि कहीं यह पूरी प्रक्रिया किसी विशेष फर्म को लाभ पहुंचाने या कथित “टेंडर रिंग” को साधने के उद्देश्य से तो नहीं अपनाई गई। हालांकि, इस संबंध में अब तक संबंधित विभाग की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि टेंडर प्रक्रिया में हुए समय, संसाधनों और सरकारी धन के संभावित नुकसान की जिम्मेदारी किसकी तय की जाएगी।
राज्य में विष्णुदेव साय के नेतृत्व में सुशासन और पारदर्शिता पर जोर दिया जा रहा है। ऐसे में इस तरह की घटनाएं शासन के दावों पर भी सवाल खड़े करती हैं।
अब देखना होगा कि प्रशासन इस मामले में जांच कर जिम्मेदारों पर कार्रवाई करता है या नहीं।

