
बालोद.. नगर पालिका मे हो रहे खेला को संज्ञान मे लीजिए ‘साहेब’! ‘टुकड़ा भुगतान’ का यह खेल किसके आशीर्वाद और इशारे से हो रहा है लोगो मे चर्चा का विषय बना हुआ है लगातार अपनी मनमानी का भण्डा खुद पालिका फोड़ ने मे लगी है ऐसा भी चर्चा आम है
आज जब संयुक्त संचालक और जिला नोडल अधिकारी दौरे पर पहुंच हैं, तो उनका ध्यान पालिका के उस ‘फ्लाइंग’ खेल की तरफ खींचना चाहते हैं, जो सीधे तौर पर भण्डार क्रय नियमों को हवा में उड़ाकर खेला गया है।
आपकी फाइलों में जो पारदर्शिता दिखती है, धरातल पर उसे छोटे-छोटे बिलों में काटकर दफन कर दिया गया है। ‘साहेब’, इन तीन कड़वे सवालों की फाइल भी खुलवा लीजिए:
1. जब पीआईसी से टेंडर आमंत्रण की स्वीकृति और ₹30.00 लाख की वित्तीय व प्रशासकीय स्वीकृति मिल चुकी थी, तो टेंडर प्रक्रिया को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया?
2. वित्तीय वर्ष 2025-26 के 10 महीनों में नियमों से बचने के लिए फ्लैक्स, बैनर एवं अन्य छपाई के बड़े बजट को छोटे-छोटे बिलों में क्यों बांटा गया?
3. हद तो तब हो गई जब पिछले मात्र 2 महीनों के भीतर ₹2,71,000 का भुगतान चहेती फर्मों को कर दिया गया।
‘साहेब’, उम्मीद है कि आपका यह दौरा सिर्फ कागजी औपचारिकताओं और ‘सब ऑल इज वेल’ की रिपोर्ट तक सीमित नहीं रहेगा। चहेतों को उपकृत करने वाले इस ‘टुकड़ा भुगतान’ के उस्तादों पर आपकी कार्रवाई का हंटर जरूर चलेगा!



