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डबल इंजन सरकार में जनप्रतिनिधि धरने पर, बस स्टैंड जलभराव ने खोली अफसरशाही की पोल

बालोद | छत्तीसगढ़ में भाजपा की डबल इंजन की सरकार होने के बावजूद छोटे-छोटे विकास कार्यों के लिए भाजपा जनप्रतिनिधियों को धरने पर बैठने की स्थिति बन रही है। बालोद शहर में सामने आए एक मामले ने प्रशासनिक कार्यप्रणाली और अफसरशाही को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। बस स्टैंड क्षेत्र में नाली निर्माण में हुई कथित लापरवाही को लेकर नगर पालिका परिषद बालोद की अध्यक्ष सहित जनप्रतिनिधियों और व्यापारियों ने विरोध प्रदर्शन करते हुए धरना दिया।
जानकारी के अनुसार कुछ समय पूर्व एनएच विभाग द्वारा बस स्टैंड क्षेत्र में सड़क एवं नाली निर्माण का कार्य कराया गया था। आरोप है कि यह निर्माण कार्य त्रुटिपूर्ण एवं लापरवाहीपूर्ण तरीके से किया गया। नाली की ढलान और जल निकासी व्यवस्था ठीक नहीं होने के कारण हल्की बारिश में ही बस स्टैंड क्षेत्र में जलभराव की स्थिति निर्मित हो जाती है। इससे व्यापारियों के कारोबार पर असर पड़ता है और यात्रियों तथा आम नागरिकों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
स्थानीय व्यापारियों और जनप्रतिनिधियों ने बताया कि इस समस्या को लेकर कई बार संबंधित विभाग को अवगत कराया गया, लेकिन विभागीय अधिकारियों द्वारा कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। लगातार शिकायतों के बावजूद समाधान नहीं होने से नाराज होकर नगर पालिका परिषद बालोद की अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, पार्षदों और भाजपा पदाधिकारियों ने धरना प्रदर्शन शुरू किया।
धरने पर बैठे जनप्रतिनिधियों ने आरोप लगाया कि अफसरशाही इतनी हावी हो चुकी है कि जनप्रतिनिधियों की बात भी नहीं सुनी जा रही है। अधिकारियों द्वारा शिकायतों को अनदेखा किया जा रहा है और कई मामलों में दुर्व्यवहार की शिकायतें भी सामने आ रही हैं। जनप्रतिनिधियों का कहना है कि जब सरकार विकास कार्यों को प्राथमिकता दे रही है, तब अधिकारियों की लापरवाही और मनमानी से विकास कार्य प्रभावित हो रहे हैं बड़े नेता जनप्रतिनिधि भी चुप्पी साधे बैठे हुए हैं आखिर कर ये सब क्या साबित कर रहे हैं
धरने में शामिल लोगों ने यह भी कहा कि प्रशासन का दायित्व जनता के हितों को ध्यान में रखते हुए विकास कार्यों को समय पर और गुणवत्तापूर्ण तरीके से पूरा करना होता है, लेकिन वर्तमान स्थिति में अधिकारी अपनी जिम्मेदारियों से बचते नजर आ रहे हैं। इससे जनता में भी नाराजगी बढ़ रही है।
स्थानीय नागरिकों ने भी इस मामले को गंभीर बताते हुए कहा कि बस स्टैंड शहर का प्रमुख क्षेत्र है, जहां रोजाना हजारों लोगों की आवाजाही होती है। ऐसे में जलभराव की समस्या शहर की व्यवस्था को प्रभावित कर रही है और दुर्घटनाओं की आशंका भी बनी रहती है।
धरना दे रहे जनप्रतिनिधियों और व्यापारियों ने मांग की है कि नाली निर्माण में हुई त्रुटियों को तत्काल सुधारा जाए और जलभराव की समस्या का स्थायी समाधान किया जाए। साथ ही संबंधित अधिकारियों के खिलाफ उच्च स्तर पर शिकायत कर कार्रवाई की मांग भी उठाई गई है।
जनप्रतिनिधियों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही समस्या का समाधान नहीं किया गया, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। उनका कहना है कि जनता ने विकास के लिए सरकार बनाई है और “सबका साथ, सबका विकास” का लक्ष्य तभी पूरा होगा जब प्रशासन और जनप्रतिनिधि मिलकर कार्य करेंगे।

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