
बालोद। शहर में अतिक्रमण हटाने को लेकर चल रही कार्रवाई अब बड़े विवाद का रूप ले चुकी है। प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं, जहां पहले चरण में गरीबों पर सख्ती दिखाई गई, वहीं बाद के चरणों में मापदंड बदलने के आरोप सामने आ रहे हैं।
जानकारी के अनुसार, पहले चरण में प्रशासन ने झलमला से कालेज तक और दल्ली चौक से एलआईसी आफिस तक सड़क किनारे लगे गरीबों के गुमटी ठेलो (गुमटी-ठेले) को और व्यापारियों के अतिक्रमण को हटाने की कार्रवाई की। इस दौरान बिना किसी वैकल्पिक व्यवस्था के कई छोटे व्यापारियों की रोजी-रोटी पर सीधा असर पड़ा। प्रभावित लोगों ने इसका विरोध भी किया और आरोप लगाया कि कार्रवाई केवल कमजोर वर्ग पर केंद्रित है।
इसके बाद गरीबों और स्थानीय लोगों द्वारा दबाव बनाए जाने पर यह मांग उठी कि कार्रवाई केवल गुमटी वालों तक सीमित न रहे, बल्कि सदर रोड जैसे प्रमुख इलाकों में भी समान रूप से की जाए। इस मांग के बाद प्रशासन ने दूसरे चरण में सदर रोड की ओर रुख किया।
जब प्रशासन की टीम सदर रोड में कार्रवाई के लिए पहुंची, तब सड़क के बीच (सेंटर) से नाप-जोख की प्रक्रिया शुरू की गई। पहले की गई मार्किंग के अनुसार घड़ी चौक से हलरदरनाथ चौक और आगे मधु चौक तक सड़क की चौड़ाई सेंटर से 6 मीटर से 15 मीटर तक निर्धारित की गई थी। इसी आधार पर व्यापारियों को पूर्व में बैठक में बताया गया था कि वे कितने अतिक्रमण में हैं।

पुराने रिकॉर्ड के अनुसार, पुराना बस स्टैंड क्षेत्र की चौड़ाई 20 से 25 मीटर और सदर रोड की चौड़ाई 20 से 40 मीटर तक थी, जो वर्तमान में काफी सिमट चुकी है। कई व्यापारियों की दुकानें इस सीमांकन के अनुसार सड़क के भीतर 15 से 20 फीट तक आती बताई गईं, जिससे उनका पूरा या आधा व्यवसाय प्रभावित होने की आशंका थी।

हालांकि, सबसे बड़ा विवाद तब सामने आया जब सदर रोड में वास्तविक कार्रवाई के दौरान मापदंड में बदलाव की चर्चा शुरू हुई। स्थानीय लोगों का आरोप है कि जहां पहले 6 से 15 मीटर तक की मार्किंग की गई थी, वहीं सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार अब इसे घटाकर 2 से 4 मीटर तक सीमित किया जा रहा है। इससे यह सवाल खड़ा हो गया है कि क्या यह बदलाव कुछ प्रभावशाली और रसूखदार लोगों को राहत देने के लिए किया गया है। लगातार अतिक्रमण को हटाने से पहले बैठकों का दौर चल रहा और रसूखदार व्यापारियों को समय के उपर समय दिया जा रहा ताकि रसूखदार इस मामले पर ज्यादा से ज्यादा राजनीतिक हस्तक्षेप कर लाभ उठा सकें इसके साथ ही बैठकों मे राजनीतिक हस्तक्षेप के चलते रसूखदारों के लिए मापदण्ड बदले जा रहे हैं जो इस ओर इशारा कर रहे हैं के प्रशासन रसूखदारों के आगे नसमस्तक है।
वहीं शहर में यह चर्चा तेज हो गई है कि क्या इस पूरे मामले में राजनीतिक दबाव काम कर रहा है? क्या कारण है कि पहले गरीबों की गुमटियां हटाने में तेजी दिखाई गई, लेकिन बड़े व्यापारिक क्षेत्रों में पहुंचते ही कार्रवाई का स्वरूप बदल गया?
वहीं आपको बता दें के इससे पहले भी प्रशिक्षु आईएएस अधिकारी ने सदर रोड अतिक्रमण को हटाने की कार्यवाही की थी जिसमें सर्वप्रथम दल्ली चौक से फौव्वारा चौक तक अतिक्रमण हटाया गया था पर वही जब सदर रोड का रुख किया गया तो राजनीतिक दबाव के चलते कार्यवाही रुक गयी थी अभी भी वही परिस्थिति उत्पन्न हो रही राजनीतिक दबाव के चलते रसूखदारों के लिए मापदण्ड बदले जा रहे।
स्थानीय नागरिकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने मांग की है कि अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई पूरी तरह पारदर्शी और समान होनी चाहिए। यदि नियम तय हैं, तो वे सभी पर एक समान लागू हों—चाहे वह गरीब हो या रसूखदार।




