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भू-माफियाओं के हौसले बुलंद: सीएमओ के आदेश का बोर्ड उखाड़ा, अब अवैध प्लॉटिंग पर धड़ल्ले से बन रही सीमेंट सड़क!

प्रशासनिक सिस्टम को सरेआम चुनौती: सरकारी चेतावनी को पैरों तले रौंदकर जमीन दलाल काट रहे चांदी, नगर पालिका कुंभकर्णी नींद में!

 

बालोद, 07 जून। जिला मुख्यालय में भू-माफिया और जमीन दलालों का आतंक इस कदर बढ़ गया है कि अब उन्हें न तो प्रशासन का खौफ है और न ही कानून का। मामला खसरा क्रमांक 621/8, 621/9, 621/10, 621/12, 621/13, और 621/18 का है, जहां मुख्य नगर पालिका अधिकारी (CMO) के नाम से एक स्पष्ट वैधानिक चेतावनी बोर्ड लगाया गया था।

अवैध प्लॉटों की धड़ल्ले से रजिस्ट्री और बिक्री:

बोर्ड पर साफ अक्षरों में लिखा था कि इस भूमि पर अवैध प्लाटिंग है और इसका क्रय-विक्रय पूरी तरह गैरकानूनी है। साथ ही यह भी चेतावनी दी गई थी कि बोर्ड को नुकसान पहुंचाने वाले पर कानूनी कार्रवाई होगी। लेकिन, चंद रुपयों के लालच में अंधे हो चुके लोगो ने न सिर्फ उस सरकारी बोर्ड को उखाड़ फेंका, बल्कि भोले-भाले खरीदारों को झांसा देकर अवैध प्लॉटों की धड़ल्ले से रजिस्ट्री और बिक्री भी कर दी।

बिना परमिशन बन रही ‘सीमेंट सड़क’, आखिर शह किसकी है?

हैरानी की बात तो यह है कि बोर्ड हटाने और अवैध बिक्री करने के बाद भी इनका मन नहीं भरा। अब उसी प्रतिबंधित भूमि पर बिना किसी सरकारी अनुमति के धड़ल्ले से सीमेंट की पक्की सड़क का निर्माण किया जा रहा है। आखिर मुख्य नगर पालिका अधिकारी के आदेश की धज्जियां उड़ाने की हिम्मत इनमें आई कहां से? क्या इस पूरे अवैध खेल में नगर पालिका के ही कुछ भ्रष्ट अधिकारियों और कर्मचारियों की मौन सहमति है?

अवैध कॉलोनी को वैध दिखाने की कोशिश?

जानकारों का मानना है कि बिना अनुमति सड़क निर्माण का उद्देश्य अवैध प्लॉटिंग को विकसित कॉलोनी का स्वरूप देना हो सकता है, ताकि खरीदारों को आकर्षित किया जा सके। आमतौर पर सड़क, बिजली और अन्य मूलभूत सुविधाएं दिखाकर प्लॉटों की बिक्री तेज की जाती है।

फंस न जाए आपकी गाढ़ी कमाई, खुद जिम्मेदार होंगे खरीदार:

​नगर पालिका प्रशासन ने पहले ही साफ कर दिया था कि इस विवादित और अवैध जमीन को खरीदने या बेचने वाला खुद जिम्मेदार होगा। दलाल अपनी जेबें भरकर रफूचक्कर हो जाएंगे, लेकिन बिना डायवर्शन और बिना टाउन एंड कंट्री प्लानिंग की मंजूरी के बन रही इस अवैध कॉलोनी में जो भी आम आदमी अपनी गाढ़ी कमाई फंसाएगा, उनको भविष्य में परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।

सवालों के घेरे में निकाय प्रशासन:

सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब नगर पालिका ने स्वयं भूमि को अवैध प्लॉटिंग वाला क्षेत्र घोषित कर चेतावनी बोर्ड लगाया था, तो फिर बोर्ड हटने के बाद प्रशासन ने क्या कार्रवाई की? यदि बोर्ड को नुकसान पहुंचाना दंडनीय अपराध था, तो दोषियों की पहचान कर अब तक क्या कानूनी कदम उठाए गए? स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि अवैध प्लॉटिंग पर प्रशासन की कार्रवाई केवल बोर्ड लगाने तक सीमित रह जाए और उसके बाद खुलेआम प्लॉट बिक्री व सड़क निर्माण होने लगे, तो यह कानून के भय के समाप्त होने का संकेत है।

सरकारी आदेशों की खुली अवहेलना का उदाहरण:

यदि सरकारी चेतावनी बोर्ड भी भू-माफियाओं के सामने सुरक्षित नहीं है, तो आम नागरिकों की जमीन और कानून की रक्षा कौन करेगा? अब निगाहें प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं। यदि समय रहते कठोर कदम नहीं उठाए गए, तो यह मामला केवल अवैध प्लॉटिंग का नहीं, बल्कि सरकारी आदेशों की खुली अवहेलना का उदाहरण बन सकता है।

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