
नगर पालिका PIC या ‘मंदिर का घंटा’?… अफसर जब चाहें, जैसे चाहें बजा रहे! ₹60 लाख के टेंडर में झूठ का खेल उजागर
प्रेसिडेंट-इन-काउंसिल (PIC) जैसी जिम्मेदार संस्था को ‘मंदिर का घंटा’ समझ लिया है—जब चाहा, जैसे चाहा, अपने फायदे के लिए बजा दिया!
वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए प्लेसमेंट एजेंसी की नियुक्ति के नाम पर जो खेल खेला गया है, वह सीधे तौर पर वित्तीय अनियमितता का खुला सबूत है।
PIC को ‘गुमराह’ करने और चहेती एजेंसी ‘शिवशक्ति कंस्ट्रक्शन’ की समयावधि बढ़ाने के लिए 18 मई की बैठक में एक बकायदा सफेद झूठ परोसा गया।
प्रस्ताव में लिखा गया कि प्लेसमेंट एजेंसी नियुक्ति हेतु निविदा प्रक्रियाधीन होने के कारण शिवशक्ति कंस्ट्रक्शन को एजेंसी नियुक्त किया गया है।
18 मई को दावा: टेंडर प्रक्रियाधीन है। जबकि असलियत यह है कि टेंडर का आधिकारिक विज्ञापन ही 5 जून को जारी हुआ है।
सीधा सवाल: जो टेंडर 18 मई को अस्तित्व में ही नहीं था, जो विज्ञापन पोर्टल पर लाइव ही नहीं हुआ था, वह अफसरों की फाइलों में ‘प्रक्रियाधीन’ कैसे हो गया? क्या यह सिर्फ रायपुर की चहेती एजेंसी को उपकृत करने के लिए बुना गया एक काल्पनिक जाल था?


