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बालोद नगर पालिका में ’60 लाख’ का खेल: पीआईसी ने किया परिषद के अधिकारों का हनन; बिना अधिकार क्षेत्र के पास किया प्रस्ताव, 10 लाख का भुगतान भी घेरे में!


बालोद, 22 मई। नगर पालिका परिषद बालोद में प्लेसमेंट एजेंसी ‘मेसर्स शिवशक्ति कंस्ट्रक्शन रायपुर’ को नियम विरुद्ध उपकृत करने के मामले में अब एक ऐसा सनसनीखेज कानूनी खुलासा हुआ है, जिसने नगर पालिका प्रशासन सहित प्रेसीडेंट इन काउंसिल को सीधे कटघरे में खड़ा कर दिया है। 18 मई 2026 को हुई पीआईसी की बैठक में जिस 60 लाख रुपये के टेंडर को सेवा विस्तार देने का निर्णय (विषय क्रमांक 46) लिया गया, वास्तव में वह पीआईसी के अधिकार क्षेत्र में आता ही नहीं था। नियमों को ताक पर रखकर लिए गए इस फैसले से हड़कंप मच गया है।

अधिनियम का खुला उल्लंघन, सामान्य सभा को किया दरकिनार:

छत्तीसगढ़ नगर पालिका अधिनियम के वित्तीय प्रावधानों के अनुसार, नगर पालिका की प्रेसीडेंट इन काउंसिल को केवल 1 लाख रुपये से अधिक और अधिकतम 30 लाख रुपये तक के वित्तीय मामलों पर निर्णय लेने का अधिकार है। अधिनियम में स्पष्ट प्रावधान है कि 30 लाख रुपये से अधिक किंतु 2 करोड़ रुपये से अनधिक (कम) राशि के मामलों पर निर्णय लेने का सर्वाधिकार केवल नगर पालिका परिषद (सामान्य सभा) को है।

परिषद को किया बाईपास, 60 लाख के टेंडर की बढ़ी मियाद;

चूंकि प्लेसमेंट टेंडर की राशि 60 लाख रुपये है, इसलिए नियमों के तहत इस पर निर्णय लेने के लिए पार्षदों की सामान्य सभा की बैठक बुलाई जानी अनिवार्य थी। लेकिन अफसरों और चुनिंदा जनप्रतिनिधियों ने पूरी परिषद को बाईपास करते हुए बंद कमरे में पीआईसी से ही इस 60 लाख के टेंडर की मियाद बढ़ा दी।

अवैध प्रस्ताव के दम पर सरकारी खजाने से आहरण:

इस मामले की गंभीरता तब और बढ़ जाती है जब इस विधिक रूप से शून्य और अवैध पीआईसी प्रस्ताव के पारित होने के तुरंत बाद, नगर पालिका प्रशासन द्वारा शिवशक्ति कंस्ट्रक्शन को पिछले वित्तीय वर्ष के मार्च महीने का लगभग 10 लाख रुपये का भुगतान भी जारी कर दिया गया। जानकारों का कहना है कि जब मूल प्रस्ताव ही अधिकार क्षेत्र से बाहर होने के कारण गैर-कानूनी है, तो उसके आधार पर किया गया लाखों का भुगतान सीधे तौर पर वित्तीय अनियमितता और पद के दुरुपयोग की श्रेणी में आता है।

नगरीय प्रशासन विभाग से शिकायत की तैयारी;

इस मामले में अब नगर पालिका के अन्य पार्षदों और जागरूक नागरिकों द्वारा सीधे जिला कलेक्टर और नगरीय प्रशासन विभाग के संचालक से पीआईसी के इस अवैध प्रस्ताव को तत्काल निरस्त करने और जिम्मेदार अधिकारियों व लेखापाल पर दंडात्मक कार्रवाई की मांग की जा रही है।

विपक्ष की रहस्यमयी खामोशी;

इस पूरे मामले का सबसे बड़ा पहलू नगर पालिका बालोद के मुख्य विपक्षी दल और उसके पार्षदों की भूमिका है। छत्तीसगढ़ नगर पालिका अधिनियम के तहत 30 लाख से अधिक और 2 करोड़ रुपये तक के हर वित्तीय फैसले का अधिकार केवल और केवल ‘सामान्य सभा’ (परिषद) के पास सुरक्षित है, जहां विपक्ष के पास अपनी आवाज बुलंद करने का पूरा मौका होता है। लेकिन पीआईसी ने बंद कमरे में अकेले ही 60 लाख रुपये के टेंडर का सेवा विस्तार कर दिया और पूरे विपक्ष के अधिकारों पर डाका डाल दिया।

‘सेटिंग’ या ‘लापरवाही’ के उठ रहे सवाल!

इसके बावजूद, पिछले 14 महीनों से बिना टेंडर चल रहे इस 22% एक्स्ट्रा के खेल और हाल ही में पीआईसी द्वारा पारित किए गए इस अवैध प्रस्ताव पर विपक्ष का एक भी शब्द न बोलना कई गंभीर संदेह पैदा करता है। बालोद की जनता पूछ रही है कि जब जनता की गाढ़ी कमाई के लाखों रुपये नियम विरुद्ध बांटे जा रहे थे और मार्च महीने का 10 लाख का भुगतान पिछले दरवाजे से किया गया, तब विपक्ष के पार्षद किस ‘सांठगांठ’ या ‘मूक सहमति’ के तहत गहरी नींद में सोए हुए थे?

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