
*वार्ड क्रमांक 19: कागजों पर बना डाला चबूतरा, खरीदी की गयी गार्डन चेयर मामला का खुलासा सुचना के अधिकार से हुआ,,,,जनसेवक उमेश कुमार सेन ने कहा आखिर ये कैसा खेल*
बालोद – RTI से प्राप्त दस्तावेज़ चीख-चीखकर कह रहे हैं कि वार्ड क्रमांक 19 में चबूतरे का निर्माण कराया गया और उसके नाम पर सरकारी खजाने से मोटी रकम भी निकाल ली गई। लेकिन जब जनता के हक की लड़ाई लड़ने वाले आर टी आई कार्यकर्ता उमेश कुमार सेन खुद फीता और दस्तावेज लेकर मौके पर पहुंचे, तो वहां सिर्फ खाली जमीन नजर आई। जनसेवक उमेश कुमार सेन की पैनी नजरों ने इस महाघोटाले को रंगे हाथों पकड़ा कि आखिर बिना एक भी ईंट रखे चबूतरे का पूरा पैसा किसकी जेब में गया? जनसेवक उमेश कुमार सेन ने इस पर कड़ा ऐतराज जताते हुए अधिकारियों की मिलीभगत और बिना भौतिक सत्यापन के भुगतान किए जाने पर गंभीर सवाल दागे हैं। ज़ब इस बाबत पता किया गया तो पार्षद निधि से गार्डन चेयर की खरीदी की गयी है जो वार्ड के कुछ जगहों पर रखे गए हैँ पर आर टी आई मे जो जानकारी मिली है वह एकदम अलग अलग नजर आ रहा है इसमें गलती कहाँ हो रही है यह जांच का विषय है
*जनता के पैसों की इस खुली लूट का असली मास्टरमाइंड कौन है?*
जनसेवक उमेश कुमार सेन की हुंकार: “जनता के टैक्स का एक-एक रुपया वसूलेंगे”
इस पूरे मामले को पूरी ताकत से उठाने वाले और नगर पालिका के ‘कागजी महल’ को ढहाने वाले जनसेवक उमेश कुमार सेन ने साफ कर दिया है कि वह इस लड़ाई को अंजाम तक पहुंचाएंगे। जनसेवक उमेश कुमार सेन का कहना है:
”जनता अपने खून-पसीने की कमाई से टैक्स देती है ताकि शहर का विकास हो, इसलिए नहीं कि अधिकारी और ठेकेदार मिलकर उसे कागजों पर डकार जाएं। जब तक इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच नहीं हो जाती और दोषियों को जेल नहीं भेजा जाता, मेरा संघर्ष जारी रहेगा।”
पूरे बालोद में मचा हड़कंप, निष्पक्ष जांच की मांग तेज
जनसेवक उमेश कुमार सेन के इस धमाकेदार खुलासे के बाद से बालोद की राजनीति और प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मच गया है। अब नगर पालिका के जिम्मेदार अधिकारी कैमरे और सवालों से बचते नजर आ रहे हैं। स्थानीय नागरिकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने जनसेवक उमेश कुमार सेन की इस मुहिम का पुरजोर समर्थन करते हुए मांग की है कि:
पूरे मामले की उच्च स्तरीय तकनीकी एवं प्रशासनिक जांच तत्काल शुरू हो।
सभी निर्माण कार्यों और खरीदी के मूल बिल-वाउचर सार्वजनिक किए जाएं।
जनसेवक उमेश कुमार सेन द्वारा उजागर किए गए तथ्यों के आधार पर दोषी अधिकारियों पर एफआईआर (FIR) दर्ज की जाए।
अब देखना यह होगा कि जनसेवक उमेश कुमार सेन की इस कड़वी सच्चाई के बाद जिला प्रशासन क्या कदम उठाता है, या फिर यह मामला भी फाइलों के नीचे दबाने की कोशिश की जाएगी? लेकिन एक बात तय है, जनसेवक उमेश कुमार सेन ने जनता की आंखें खोल दी हैं।



