
दोहरा चरित्र: टैक्स लेने में अव्वल, अनुज्ञा देने में अड़ंगा
शहर में जहां एक तरफ अवैध कॉलोनियों में डामर रोड, नाली निर्माण कर उपकृत किया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर सभी वैधानिक अनुमतियां लेकर बैठे नागरिक को अपने ही मकान की भवन अनुज्ञा के लिए पालिका के चक्कर काटने पड़ रहे हैं।
हैरत की बात यह है कि जिस निर्माण की अनुज्ञा देने में पालिका तकनीकी पेंच फंसा रही है, उसी मकान का संपत्ति कर और समेकित कर कई वर्षों से नियमित रूप से अपनी तिजोरी में जमा कर रही है।
खसरा नंबर 866/24 भूमि पर सक्षम राजस्व न्यायालय द्वारा बाकायदा विधिवत प्रक्रिया अपनाते हुए 26 नवंबर 2020 को आवासीय डायवर्सन आदेश जारी किया गया था।
डायवर्सन से पूर्व पालिका ने खुद इश्तहार जारी कर दावा-आपत्ति मंगाई थी, जिसमें शून्य आपत्ति आई। तत्कालीन CMO ने 18 सितंबर 2020 को लिखित में पत्र के जरिए NOC दी थी कि उन्हें इस भूमि के व्यपवर्तन कोई एतराज नहीं है।
जब सक्षम प्राधिकारी ने वैधानिक आदेश पारित किया है और पालिका खुद एनओसी देकर टैक्स वसूल रही है, तो अनुज्ञा रोकना न केवल प्रशासनिक मनमानी है, बल्कि संविधान के अनुच्छेद 14 के तहत समानता के अधिकार का खुला हनन है।


