
*वार्ड क्रमांक 15- पालिका अध्यक्ष की निधि से लगे 10 लाख के झूले लोगो मे कौतुहल का विषय आखिर कितना भव्य होंगे सभी झूले,,,,मामला का खुलासा सुचना के अधिकार से हुआ*
बालोद – बालोद के आर टी आई एवं समाजसेवी कार्यकर्ता उमेश सेन ने सुचना के अधिकार के तहत ली जानकारी का खुलासा करते हुए बताया की बालोद नगर पालिका क्षेत्र अंतर्गत नया पुलिस लाइन वार्ड 15 मे अध्यक्ष निधि से 10 लाख का झूला खरीदी किया है इस मामले की खबर शहर मे लोगो को लगते ही भव्य झूलो को देखने लोग पुलिस लाइन पहुँच रहे हैँ पर मायूस होकर लौट रहे हैँ
*पुलिस लाइन में झूला घोटाला- ₹62,500 का एक झूला देख चौंके आर टी आई कार्यकर्त्ता उमेश सेन *
इस पूरे मामले का सबसे हैरान करने वाला अध्याय बालोद पुलिस लाइन परिसर में सामने आया है। यहाँ नगर पालिका अध्यक्ष निधि से लगभग 10 लाख रुपये की लागत से 16 झूले लगाए गए हैं। जब गणित के हिसाब से जनसेवक उमेश कुमार सेन ने इसका आकलन किया, तो एक झूले की औसत कीमत लगभग ₹62,500 निकल कर आई! इस अकल्पनीय कीमत को देखकर जनसेवक उमेश कुमार सेन के साथ-साथ तकनीकी विशेषज्ञ भी सन्न रह गए हैं।
जनसेवक उमेश कुमार सेन ने उठाए तीखे सवाल:
क्या इस खरीदी प्रक्रिया में टेंडर के सभी नियमों का ईमानदारी से पालन किया गया था?
क्या ₹62,500 के झूले की वास्तविक बाजार कीमत की जांच की गई थी?
जनता के पैसों की इस खुली लूट का असली मास्टरमाइंड कौन है?
जनसेवक उमेश कुमार सेन की हुंकार: “जनता के टैक्स का एक-एक रुपया वसूलेंगे”
इस पूरे मामले को पूरी ताकत से उठाने वाले और नगर पालिका के ‘कागजी महल’ को ढहाने वाले जनसेवक उमेश कुमार सेन ने साफ कर दिया है कि वह इस लड़ाई को अंजाम तक पहुंचाएंगे। जनसेवक उमेश कुमार सेन का कहना है:
”जनता अपने खून-पसीने की कमाई से टैक्स देती है ताकि शहर का विकास हो, इसलिए नहीं कि अधिकारी और ठेकेदार मिलकर उसे कागजों पर डकार जाएं। जब तक इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच नहीं हो जाती और दोषियों को जेल नहीं भेजा जाता, मेरा संघर्ष जारी रहेगा।”
पूरे बालोद में मचा हड़कंप, निष्पक्ष जांच की मांग तेज
जनसेवक उमेश कुमार सेन के इस धमाकेदार खुलासे के बाद से बालोद की राजनीति और प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मच गया है। अब नगर पालिका के जिम्मेदार अधिकारी कैमरे और सवालों से बचते नजर आ रहे हैं। स्थानीय नागरिकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने जनसेवक उमेश कुमार सेन की इस मुहिम का पुरजोर समर्थन करते हुए मांग की है कि:
पूरे मामले की उच्च स्तरीय तकनीकी एवं प्रशासनिक जांच तत्काल शुरू हो।
सभी निर्माण कार्यों और खरीदी के मूल बिल-वाउचर सार्वजनिक किए जाएं।
जनसेवक उमेश कुमार सेन द्वारा उजागर किए गए तथ्यों के आधार पर दोषी अधिकारियों पर एफआईआर (FIR) दर्ज की जाए।
अब देखना यह होगा कि जनसेवक उमेश कुमार सेन की इस कड़वी सच्चाई के बाद जिला प्रशासन क्या कदम उठाता है, या फिर यह मामला भी फाइलों के नीचे दबाने की कोशिश की जाएगी? लेकिन एक बात तय है, जनसेवक उमेश कुमार सेन ने जनता की आंखें खोल दी हैं।



