
*साधन संपन्न पालिका और बेहाल जनता…. 24 करोड़ 25 लाख की योजना के बाद भी नलों से टपक रहा धुंधला और गन्दा पानी*
बालोद.- ✒️ (संजीव नायर ) – कहते हैं कि ‘जल ही जीवन है’, लेकिन बालोद नगर पालिका के कर्ताधर्ता लोगो ने इस जीवन को ही एक बड़ा मजाक बना दिया है। सवाल यह उठ रहा है कि क्या यह महज प्रशासनिक सुस्ती है, या फिर सुशासन की सरकार को जनता की नजरों में बदनाम करने की कोई गहरी सोची-समझी साजिश?
योजनाएं कागजों पर कितनी आलीशान होती हैं, इसका जीता-जागता सबूत बालोद की 24 करोड़ 25 लाख रुपये की जल आवर्धन योजना है। जनता को लगा था कि इस भारी-भरकम बजट के बाद उनके घरों के नलों से साफ पानी की गंगा बहेगी।
लेकिन हकीकत यह है कि इतनी साधन संपन्न होने के बावजूद नगर पालिका जनता को पीने का साफ पानी तक मुहैया नहीं करा पा रही है।आखिर 24 करोड़ से ज्यादा की यह राशि किसकी प्यास बुझाने के काम आई? जनता के हलक तो आज भी सूखे हैं, और नलों से जो पानी आ रहा है, वह पीने लायक तो कतई नहीं है। करोड़ों के प्रोजेक्ट के बाद भी अगर जनता को साफ पानी के लिए तरसना पड़े, तो इस जल आवर्धन योजना की सफलता पर एक बड़ा प्रश्नचिह्न खड़ा होता है।


