देखिए कलेक्टर मैडम जी! मंडी विभाग में ‘सूरज ढलते ही’ शुरू हुआ टेंडर का खेल

संपादक – संजीव मणि नायर
बालोद। 5:30 बजे बंद हुआ काउंटर, रात के अंधेरे में जागी ‘प्रशासनिक आत्मा’; टॉर्च की रोशनी में छप गई अपात्रों की सूची!
जिला प्रशासन में पारदर्शिता और सुशासन का दावा करने वाले आला अधिकारियों की नाक के नीचे स्थानीय मंडी विभाग में नियमों की ऐसी धज्जियां उड़ाई गई हैं, जिसे देखकर आम जनता और ठेकेदार हैरान हैं।
निविदा विज्ञापन एक कानूनी दस्तावेज की तरह होता है। अगर उसमें लिखा था कि 7 जुलाई को सायं 5:30 बजे तक फॉर्म का विक्रय होगा, तो विभाग इस समय सीमा को बदलने के लिए बाध्य नहीं था।
बिना किसी ‘शुद्धिपत्र’ के निर्धारित समय पर फॉर्म न बेचना सीधे तौर पर नियमों की धज्जी उड़ाना है। चर्चा है कि इस पूरी ‘फास्ट फॉरवर्ड’ स्क्रिप्ट के पीछे मोटे कमीशन का वो गणित है, जो केवल खास चहेते ठेकेदारों के कैलकुलेटर में ही फिट बैठता है।
जब तक प्रतिस्पर्धा जिंदा रहेगी, तब तक रेट कम आएंगे और जब रेट कम आएंगे तो ऊपर का ‘परसेंटेज’ कम हो जाएगा। इसलिए ‘रिंग’ बनाने के इस खेल में विभाग ने खुद अंपायर बनकर अनचाहे खिलाड़ियों को खेल शुरू होने से पहले ही ‘रेड कार्ड’ दिखा दिया।


