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पीआईसी की वित्तीय सीमा से बाहर प्रस्ताव! BALOD नगर पालिका में प्लेसमेंट श्रमिकों के नाम पर नियमों को दरकिनार करने के आरोप

बालोद – नगर पालिका में प्लेसमेंट श्रमिकों के नियोजन को लेकर एक बार फिर वित्तीय नियमों और प्रशासनिक प्रक्रियाओं पर सवाल खड़े हो गए हैं। नए वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए निविदा प्रक्रिया पूर्ण होने तक पुराने ठेके को जारी रखने की तैयारी ने परिषद और प्रशासन दोनों को कटघरे में ला खड़ा किया है।
जानकारी के अनुसार, “प्रशासनिक आवश्यकता” का हवाला देते हुए प्लेसमेंट श्रमिकों के कार्य को न्यूनतम निविदा दर पर जारी रखने संबंधी प्रस्ताव PIC (प्रेसिडेंट इन काउंसिल) बैठक में लाया गया है। लेकिन इस प्रस्ताव की अनुमानित राशि करोड़ों रुपये बताई जा रही है, जबकि PIC की वित्तीय स्वीकृति सीमा निर्धारित नियमों के अनुसार 1 लाख रुपये से अधिक किंतु अधिकतम 30 लाख रुपये तक ही सीमित है।
ऐसे में सवाल उठ रहा है कि यदि प्रस्ताव की राशि निर्धारित सीमा से अधिक है, तो आखिर किस अधिकार से PIC इसे मंजूरी देने की तैयारी कर रही है। नगर पालिका के जानकारों का कहना है कि इतनी बड़ी वित्तीय स्वीकृति परिषद अथवा सक्षम प्राधिकारी के स्तर पर ही संभव है।
ऑडिट में फंस सकता है मामला
वित्तीय मामलों के जानकारों के अनुसार यदि वित्तीय शक्तियों से बाहर जाकर इस प्रस्ताव पर भुगतान जारी किया गया, तो आगामी सरकारी ऑडिट में इसे गंभीर वित्तीय अनियमितता माना जा सकता है। सूत्रों का कहना है कि नियमों की अनदेखी कर की गई स्वीकृति पर संबंधित अधिकारियों एवं PIC सदस्यों से रिकवरी तक की कार्रवाई संभव है।
कानूनी विशेषज्ञों का भी मानना है कि यदि बिना सक्षम स्वीकृति के करोड़ों रुपये का भुगतान किया जाता है, तो इसे पद के दुरुपयोग और वित्तीय अनियमितता की श्रेणी में रखा जा सकता है।
“पालिका चला कौन रहा है?”
मामले के सामने आने के बाद परिषद के कुछ सदस्यों और शहर के जागरूक नागरिकों के बीच नाराजगी बढ़ती दिखाई दे रही है। लोगों का कहना है कि यदि प्रशासनिक आवश्यकता के नाम पर बार-बार नियमों को दरकिनार किया जाएगा, तो वित्तीय पारदर्शिता और जवाबदेही का क्या महत्व रह जाएगा।
नगर पालिका की कार्यप्रणाली को लेकर अब यह सवाल खुलकर उठने लगा है कि आखिर बालोद नगर पालिका नियमों के तहत संचालित हो रही है या फिर कुछ चुनिंदा लोगों की मर्जी से फैसले लिए जा रहे हैं।
फिलहाल पूरे मामले को लेकर परिषद और प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है, लेकिन यह मुद्दा आने वाले दिनों में नगर पालिका की राजनीति और प्रशासन दोनों में बड़ा विवाद बन सकता है।

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