
झूठ के पांव नहीं होते, फिर भी निकाय प्रशासन उसी के सहारे दौड़ रहा: डंप साइट के प्रस्ताव पर चुप्पी क्यों?
झूठ के पांव नहीं होते—यह कहावत पालिका प्रशासन के नए-नए बयानों पर सटीक बैठती है। अपनी गड़बड़ियों पर घिरने के बाद अब निकाय के तकनीकी अमले ने बेसिक शाला प्रबंधन की एनओसी का नया शिगूफा छोड़ दिया है।
तकनीकी अमले का दावा है कि सरदार पटेल मैदान के लिए बेसिक शाला प्रबंधन से एनओसी मिली थी और डीएमएफ से राशि मंजूर होने के बाद टेंडर प्रक्रिया पूरी कर वर्क ऑर्डर जारी किया गया था।
लेकिन इस खोखले दावे ने पालिका की नीयत और कार्यप्रणाली पर और भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पहला सवाल: एनओसी मांगी किसने थी—चुनी हुई परिषद ने या मनमौजी प्रशासन ने?
प्रशासन जनता को यह साफ करे कि सरदार पटेल मैदान की बलि चढ़ाने के लिए बेसिक शाला प्रबंधन से एनओसी मांगने की हिम्मत किसने की?
क्या इसके लिए कोई विधिवत प्रस्ताव पारित हुआ था? या फिर चंद अफसरों ने बंद कमरों में बैठकर अपनी मनमर्जी से एनओसी का खेल रच डाला?
जब परिषद के सदस्य एक सुर में मैदान बचाने की बात कह रहे हैं, तो फिर सदस्यों को अंधेरे में रखकर एनओसी किसके इशारे पर हासिल की गई?



