
झूठ की पराकाष्ठा: डंप साइट का स्टीमेट जेब में रखकर पटेल मैदान को लीलने की साजिश
बेशर्मी और प्रशासनिक निकम्मेपन की सारी हदें पार करते हुए नगर पालिका के जिम्मेदार अब जनता के सामने सफेद झूठ परोसने पर उतर आए हैं।
जब सरदार पटेल मैदान को उजाड़ने की साजिश पर चौतरफा घेराबंदी हुई, तो अफसरों ने मीडिया में बेतुका राग अलाप दिया कि सरयू प्रसाद अग्रवाल स्टेडियम के पास जमीन निजी होने के कारण पटेल मैदान का विकल्प चुना गया।
नगरपालिका के हुक्मरानों से सीधा सवाल है—अगर जमीन निजी थी, तो तुम्हारी फाइलों में टेक्निकल सैंक्शन और स्टीमेट सरकारी डंप साइट (स्टेडियम के पास) के नाम पर कैसे पास हो गया?
निकाय के काबिल इंजीनियरों ने क्या खाकर निजी जमीन पर सरकारी खजाने का स्टीमेट तैयार किया था? और सबसे बड़ा तमाशा देखिए— टेंडर पर सक्षम सहायक अभियंता तक के हस्ताक्षर नहीं हैं।
अफसर जनता को मूर्ख समझना बंद करें। अगर थोड़ी भी नैतिकता बची है, तो यह बताएं कि बिना दस्तखत वाले टेंडर और फर्जी साइट ट्रांसफर के इस पूरे खेल का असली मास्टरमाइंड कौन है?



