
उमेश सेन ने फिर उठाया जनहित का सबसे बड़ा मुद्दा…..बालोद की ‘लाइफलाइन’ खरखरा कैनाल पर संकट, सिस्टम की लापरवाही पर बड़ा सवाल
बालोद। शहर की जीवनदायिनी (लाइफलाइन) कही जाने वाली ऐतिहासिक खरखरा कैनाल आज भू-माफियाओं और अतिक्रमणकारियों के आगे घुटने टेक दी हैँ वहीं अपने वजूद की आखिरी लड़ाई भी लड़ रही है। शिकारीपारा से लेकर आमापारा तक इस महत्वपूर्ण नहर का गला घोंटा जा रहा है, लेकिन सिंचाई विभाग और स्थानीय प्रशासन कुंभकर्णी नींद में सोया हुआ है। सरकारी तंत्र की इसी घोर लापरवाही के खिलाफ एक बार फिर जनता मे आक्रोश साफ देखा जा सकता हैँ
सामाजिक कार्यकर्ता उमेश सेन ने इस गंभीर मुद्दे को प्रमुखता से उठाते हुए प्रशासन की कार्यप्रणाली पर कई तीखे सवाल खड़े किए हैं और इसे बालोद के भविष्य के साथ खिलवाड़ बताया है।
शिकारीपारा से आमापारा: रसूखदारों के आगे नतमस्तक हुआ विभाग?
उमेश सेन द्वारा उजागर किए गए तथ्यों और स्थानीय नागरिकों से मिली जानकारी के अनुसार, शिकारीपारा से आमापारा के बीच कैनाल की सरकारी जमीन पर धड़ल्ले से अवैध कब्जे किए जा रहे हैं। कहीं इसे ‘प्राइवेट पार्किंग’ बना दिया गया है, तो कहीं पक्के निर्माण खड़े कर लिए गए हैं।
क्या यह सब अधिकारियों की नाक के नीचे बिना किसी मूक सहमति के मुमकिन है? शहर की जीवनदायिनी पर जब खुलेआम डाका डाला जा रहा था, तब संबंधित विभाग की टीमें दफ्तरों से बाहर क्यों नहीं निकलीं? अफसरों की यह ‘रहस्यमयी खामोशी’ आखिर क्या बयां करती है?
आने वाली तबाही का अलार्म: जलभराव और सूखे का दोहरा संकट
खरखरा परियोजना सिर्फ एक नहर नहीं, बल्कि पूरे बालोद जिले की सिंचाई व्यवस्था और जल संसाधनों की रीढ़ है। विभागीय सुस्ती के कारण इस रीढ़ को ही तोड़ा जा रहा है, जिसके दूरगामी परिणाम बेहद खतरनाक होंगे:
कृत्रिम बाढ़ का खतरा: नहर के किनारे मलबा डंप होने और रास्ता संकरा होने से आगामी बारिश में पानी का प्राकृतिक प्रवाह रुकना तय है। इससे पूरे शहर में जलभराव और बाढ़ जैसी स्थिति निर्मित हो सकती है।
पर्यावरण को भारी चोट: जलमार्ग बाधित होने से आसपास का ग्राउंड वाटर लेवल प्रभावित होगा और भविष्य में बालोद को भीषण जलसंकट का सामना करना पड़ सकता है।
कागजी कार्रवाई छोड़, कब जागेगा प्रशासन?
बालोद की जनता के हक में आवाज उठाते हुए संबंधित विभागों से तत्काल दखल देने की मांग की है। उन्होंने प्रशासन के सामने स्पष्ट रूप से ये तीन मांगें रखी हैं:
संयुक्त टास्क फोर्स का गठन: राजस्व और सिंचाई विभाग तुरंत संयुक्त रूप से शिकारीपारा से आमापारा तक सीमांकन (Demarcation) करे।
बुलडोजर कार्रवाई: बिना किसी राजनीतिक या प्रशासनिक दबाव के, अवैध रूप से किए गए सभी अतिक्रमणों को तत्काल ध्वस्त किया जाए।
लापरवाह अफसरों पर गाज: जिन अधिकारियों के कार्यकाल में यह अतिक्रमण फला-फूला और जिन्होंने शिकायतों को नजरअंदाज किया, उन पर सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए।




