
*विकास की उम्मीदों के बीच बदहाल होती स्ट्रीट लाइट व्यवस्था, नगरवासियों में बढ़ रही नाराज़गी*
डौंडीलोहारा – लगभग आठ-दस हजार की आबादी वाला नगर पंचायत डौंडीलोहारा अपनी प्राकृतिक सुंदरता, सांस्कृतिक विरासात एवं व्यापारिक गतिविधि के केंद्र के लिए जाना जाता है। विधानसभा मुख्यालय, तहसील, न्यायालय, थाना एवं अन्य शासकीय कार्यालय होने के कारण प्रतिदिन आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों से बड़ी संख्या में लोगों का आना-जाना लगा रहता है, जिससे नगर की व्यापारिक रौनक बनी रहती है।
वर्ष 2002-03 में ग्राम पंचायत से नगर पंचायत बनने के बाद लोगों को उम्मीद थी कि नगर का सुनियोजित विकास होगा और मूलभूत सुविधाओं में उल्लेखनीय सुधार देखने को मिलेगा। समय-समय पर शासन द्वारा करोड़ों रुपये की राशि भी उपलब्ध कराई गई, लेकिन नगरवासियों का आरोप है कि विकास कार्य अपेक्षित स्तर पर दिखाई नहीं देते। लोगों के बीच यह चर्चा आम है कि कई योजनाओं का लाभ धरातल पर पूरी तरह नहीं उतर सका।
नगर की पहचान मानी जाने वाली स्ट्रीट लाइट व्यवस्था, जो पूर्व अध्यक्ष प्रेम भंसाली के कार्यकाल में लगाई गई थी, एक समय रात के समय पूरे नगर को जगमगाती थी। लेकिन पिछले कई वर्षों से उचित रखरखाव के अभाव में अनेक बिजली के खंभे जर्जर हो चुके हैं, कई स्थानों पर लाइटें बंद पड़ी हैं और कुछ खंभों की स्थिति भी चिंताजनक बताई जा रही है। परिणामस्वरूप, जो नगर कभी रात में रोशनी से चमकता था, वहां अब कई इलाकों में अंधेरा पसरा रहता है।
राजनीतिक दृष्टि से भी नगर में विरोधाभासी स्थिति देखने को मिलती है। अक्सर नेता एक-दूसरे के विरोधी दिखाई देते हैं, लेकिन कई मौकों पर वही नेता एक साथ बैठते नजर आते हैं। इससे आम जनता के बीच यह सवाल उठता है कि आखिर वास्तविक मुद्दा जनहित है या राजनीति। नगरवासियों का मानना है कि राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर यदि सभी जनप्रतिनिधि विकास के लिए एकजुट होकर कार्य करें, तो डौंडीलोहारा निश्चित रूप से एक आदर्श नगर बन सकता है
