
जनहित में सामाजिक कार्यकर्त्ता उमेश कुमार सेन लगातार उठा रहे हैं मुद्दा, फिर भी नहीं हुआ स्थायी समाधान
बालोद। बालोद शहर का नया बस स्टैंड एक बार फिर अपनी बदहाल व्यवस्था को लेकर चर्चा में है। विडंबना यह है कि इस बार कोई मूसलाधार बारिश नहीं हुई, बल्कि सिर्फ हल्की बारिश ने ही बस स्टैंड की जल निकासी व्यवस्था की वास्तविक स्थिति उजागर कर दी। बारिश के बाद पूरा परिसर पानी से भर गया और बस स्टैंड तालाब जैसा दिखाई देने लगा। यात्रियों, बस चालकों, व्यापारियों एवं आम नागरिकों को भारी असुविधा का सामना करना पड़ा।
यह कोई पहली घटना नहीं है। नए बस स्टैंड में जलभराव की समस्या वर्षों से बनी हुई है। हर बारिश में यही तस्वीर सामने आती है, लेकिन जिम्मेदार विभाग और प्रशासन की ओर से अब तक कोई ऐसा स्थायी समाधान नहीं किया गया है जिससे आम जनता को राहत मिल सके।
सामाजिक कार्यकर्त्ता उमेश कुमार सेन लगातार इस गंभीर जनसमस्या को प्रमुखता से उठाते आ रहे हैं। समय-समय पर समाचार प्रकाशित कर संबंधित विभाग, नगर प्रशासन और जिम्मेदार अधिकारियों का ध्यान इस ओर आकर्षित किया गया, ताकि आम नागरिकों की परेशानी दूर हो सके। इसके बावजूद आज तक स्थिति में कोई उल्लेखनीय सुधार दिखाई नहीं दे रहा है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब हल्की बारिश में ही नए बस स्टैंड का यह हाल हो जाता है, तो लगातार होने वाली बारिश के दौरान स्थिति कितनी गंभीर होगी, इसका सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है। करोड़ों रुपये की लागत से विकसित इस बस स्टैंड में यदि जल निकासी की समुचित व्यवस्था ही नहीं है, तो यह निर्माण कार्य की गुणवत्ता और रखरखाव व्यवस्था पर भी गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े करता है।
बारिश के दौरान यात्रियों को पानी के बीच से होकर बसों तक पहुंचना पड़ता है। बुजुर्ग, महिलाएं, बच्चे और दिव्यांग यात्रियों को सबसे अधिक परेशानी उठानी पड़ती है। वहीं दुकानदारों का व्यापार भी प्रभावित होता है तथा गंदे पानी के कारण संक्रमण फैलने की आशंका भी बनी रहती है।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि केवल निरीक्षण, आश्वासन और कागजी कार्रवाई से समस्या का समाधान नहीं होगा। आवश्यक है कि जल निकासी व्यवस्था का तकनीकी परीक्षण कर स्थायी सुधार कार्य कराया जाए, ताकि हर वर्ष जनता को एक ही समस्या का सामना न करना पड़े।
जनहित में सामाजिक कार्यकर्ता उमेश कुमार सेन ने एक बार फिर संबंधित विभाग और जिला प्रशासन से मांग की है कि नए बस स्टैंड की जलभराव समस्या का शीघ्र स्थायी समाधान कराया जाए। जनता अब केवल आश्वासन नहीं, बल्कि धरातल पर प्रभावी कार्रवाई और परिणाम देखना चाहती है।


