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बालोद के अजब पालिका की गजब कहानी:भर्राशाही लूट की चल रही मनमानी

उठो लाल अब आंखें खोलो, पानी लाया हूं मुंह धो लो
उठो लाल अब आंखें खोलो, पानी लाया हूं मुंह धो लो…—बालोद नगर पालिका परिषद के निर्वाचित परिषद की वर्तमान लाचारी और बेबसी को देखकर जनता की जुबान पर आज यही तंज तैर रहा है।
जिस निर्वाचित परिषद को जनता ने अपने हक और शहर के विकास की रखवाली के लिए चुना था, वह आज अफसरशाही के दफ्तर के बाहर बेबस और ठगी सी खड़ी नजर आ रही है।
फाइलों की अलमारियों से निकले सरकारी दस्तावेजों ने एक ऐसे टाइम-ट्रैवल घोटाले की पोल खोल दी है, जिसे देखकर नियमों और कानूनों के होश उड़ जाएं।
जिस दफ्तर में 2 महीने पहले नए शेड्यूल ऑफ रेट्स पर 6 लाख रुपये का ताजा एस्टीमेट और तकनीकी स्वीकृति तैयार की गई थी, उसी दफ्तर ने अचानक 2 साल पुरानी, निष्प्रभावी हो चुकी 3.53 लाख की पुरानी टीएस को जिंदा कर टेंडर में झोंक दिया।
- सवाल उठता है कि जब 6 लाख का नया खाका पहले से मौजूद था, तो 2 साल पुराने मुर्दा एस्टीमेट पर टेंडर निकालने का यह खेल किसके इशारे पर खेला गया?




