
जहां खेल से पहले मजदूरी करते हैं खिलाड़ी
सुबह की पहली किरण जब स्टेडियम के जंग लगे शेड और उखड़ी दीवारों पर पड़ती है, तो मैदान में दौड़ते हुए नहीं, बल्कि फावड़ा और तगाड़ी चलाते हुए नौजवान नजर आते हैं।
जिस मैदान पर राज्य और राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं की तैयारी होनी चाहिए, वहां ट्रैक पर गिट्टियों के अंबार और गड्ढे पसरे हुए हैं। मैदान पर बेतरतीब पड़ी गिट्टी और मिट्टी को खिलाड़ी खुद अपनी पीठ झुकाकर समतल करते हैं।
सेना, पुलिस भर्ती और खेल प्रतियोगिताओं का सपना देखने वाले युवा पहले घंटों फावड़े से ट्रैक बनाते हैं, ताकि दौड़ते वक्त किसी के पैर की हड्डी न टूट जाए।
यह नजारा देखकर किसी का भी कलेजा कांप उठे, लेकिन पालिका के जिम्मेदारों की आंखें इस बदहाली को देखने से कतरा रही हैं।
एक तरफ जिम्मेदार अवैध प्लाटिंग के खसरों पर ₹25 वर्गफीट का खेल खेलकर बहुमत की बाजीगरी में मस्त हैं, तो दूसरी तरफ शहर का इकलौता खेल मैदान प्रशासनिक उपेक्षा की बदहाली पर आंसू बहा रहा है।




