
*”मजाक कर रहे हैं या नौकरी?”* *पिछले दो वित्तीय वर्षों से चल रहा है अंधेर नगरी-चौपट राजा का खेल, क्या नगरीय प्रशासन विभाग लेगा कड़ा एक्शन?*
बालोद नगर पालिका अपने ही बुने जाल मे खुद फंसती नजर आ रही है इन दिनों नियम-कायदों को ताक पर रखकर वित्तीय मनमानी का एक ऐसा खेल चल रहा है, जिसे देखकर कोई भी हैरान रह जाए परन्तु नगर पालिका को कोई हैरानी नहीं लगती क्योंकि खेल अपने चहितो फर्मो को उपकृत करने का जो है
पिछले एक-दो वित्तीय वर्षों से बिना किसी वैध टेंडर प्रक्रिया और बिना वर्क ऑर्डर के ही विभिन्न महत्वपूर्ण शाखाओं के लिए लाखों रुपये की सामग्री क्रय कर ली गई और अपने चहेते फर्मों को बाकायदा मलाईदार भुगतान भी कर दिया गया।
खोजी पड़ताल में यह बात सामने आई है कि निकाय की वित्तीय रीढ़ कहे जाने वाले इन 8 विभागों में बिना किसी प्रतिस्पर्धा या पारदर्शी प्रक्रिया के सीधे सामान उठाया गया और चहेते ठेकेदारों की जेबें भरी गईं।
जलप्रदाय शाखा, वाटर ट्रीटमेंट प्लांट, विद्युत शाखा, फ्लेक्स छपाई व प्रचार, डीजल क्रय, टेंट सामग्री किराया और विभिन्न समारोहों में स्वल्पाहार के नाम पर बेधड़क भुगतान चहेतों को किया गया। पता नहीं यह खेल किस अनुभवी कहलाने वाले के ईसारे मे चल रहा है या कोई पालिका मे तीसरी आँख बनकर अपने ईसारे मे यह खेल करवा रहा है अगर कड़ाई से इसकी जांच हो तो सब दूध का दूध और पानी का पानी खुद नजर आ जायेगा इस पूरे मामले की यदि निष्पक्ष और उच्च स्तरीय जांच कराई जाए, तो वित्तीय गड़बड़ी का एक बहुत बड़ा ढांचा उजागर होना तय है।
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*संजीव मणि नायर* (ब्यूरो हेड)
आमापारा बालोद जिला बालोद छत्तीसगढ़
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