
विकास को बंधक बनाने की साज़िश: बालोद में 64 में से 59 काम ठप, क्या सुशासन को पटरी से उतारने का है गुप्त प्लान?
कागजों पर 64 निर्माण कार्यों के वर्क ऑर्डर जारी हो चुके हैं, करोड़ों के टेंडर स्वीकृत हैं, मगर धरातल पर सन्नाटा पसरा हुआ है।
जब इस रहस्यमयी सुस्ती की तह तक जाने की कोशिश की गई, तो तंत्र के भीतर से एक चौंकाने वाला कारण सामने आया—ले-आउट।
सवाल यह है कि क्या यह सिर्फ प्रशासनिक लापरवाही है, या फिर विष्णुदेव साय के सुशासन की रफ्तार को थामने के लिए पर्दे के पीछे से भूपेश बघेल के दौर के पुराने सिंडिकेट का कोई सोची-समझी चाल?
नगर पालिका परिषद बालोद में 3 महीने की समय-सीमा वाले नाली और सीसी रोड निर्माण के 64 प्रोजेक्ट्स जारी किए गए। लेकिन हकीकत यह है कि महज़ 4 से 5 काम ही पूरे हो पाए हैं। बाकी 59 से अधिक काम ठप पड़े हैं।
अंदरखाने से आ रही खबरों के मुताबिक, ठेकेदार हाथ पर हाथ धरे बैठे हैं क्योंकि उन्हें नगर पालिका के जिम्मेदार तकनीकी अमले द्वारा मौके पर ले-आउट (नक्शा व सीमांकन) ही नहीं दिया जा रहा।




