
बालोद नपा या सब्जी बाजार? बिना टेंडर महंगी फिटकरी खरीदी पर सीएमओ का गैर-जिम्मेदाराना बयान!
बालोद निकाय मे बिना टेंडर टुकड़ों में हो रही महंगी एलम खरीदी पर जब CMO से जवाब मांगा गया, तो उन्होंने जो ‘तर्क’ दिए, वे न केवल हैरान करने वाले हैं बल्कि पूरी प्रशासनिक व्यवस्था पर एक करारा तंज हैं।
नियमों, टेंडरों और सरकारी पारदर्शिता की दुहाई देने के बजाय CMO साहब का बयान सुनकर ऐसा लगता है मानो वह छत्तीसगढ़ की कोई नगर पालिका नहीं, बल्कि किसी सब्जी मंडी की दुकान चला रहे हों।
एक जिम्मेदार क्लास-2 राजपत्रित अधिकारी का यह कहना कि ‘आप ही सस्ता ढूंढ कर दे दो, तो मैं आपसे खरीद लूंगा’, यह दर्शाता है कि विभाग में नियम सम्मत ओपन टेंडर और बाजार दर का आकलन करने की कोई व्यवस्था ही नहीं है।
क्या सरकारी विभागों में सामग्रियां टेंडर के बजाय इस तरह ‘सब्जी मंडी’ वाले भाव-ताव पर खरीदी जाती हैं? असल में, एक साथ टेंडर न करने की असली वजह यह है कि अगर टेंडर हुआ, तो प्रतिस्पर्धा होगी और मनमाना भाव मिलना बंद हो जाएगा।
बिना टेंडर किए एक ही चहेते सप्लायर पर इतनी अटूट मेहरबानी क्यों? घूम-फिर कर हर बार ऑर्डर उसी पुराने ठेकेदार की झोली में क्यों जा रहा है?





