
जब PWD की कुर्सी पर सफाई दरोगा बैठा रहेगा, तो करोड़ों के बजट का यही हश्र होगा
नगर पालिका परिषद BALOD में निर्माण कार्यों और टेंडर प्रक्रिया का जो हाल हुआ है, वह किसी अजूबे से कम नहीं है। हाल ही में जारी ₹54 लाख की मैनुअल निविदा इसी प्रशासनिक लापरवाही का जीता-जागता प्रमाण है।
लोक निर्माण जैसे विशुद्ध तकनीकी विभाग का हिसाब किताब जब सफाई दरोगा करेगा, तो नियमों की धज्जियां उड़ना और गुणवत्ता का कबाड़ा होना तय है।
अध्यक्ष, पार्षद और एल्डरमैन निधि में ₹1.45 करोड़ से अधिक का बजट उपलब्ध है। लेकिन यहां महज ₹54 लाख का टेंडर निकालकर इतिश्री कर ली गई। बाकी के ₹91.50 लाख ठंडे बस्ते में डाल दिए गए।
हैरानी की बात यह है कि यदि इसमें अधोसंरचना, निकाय निधि और अन्य मदों की राशि भी जोड़ दी जाए, तो इस व्यवस्था के तहत जारी टेंडर खुद ही हाथ जोड़ ले—क्योंकि इतना बड़ा बजट संभालना इस गैर-तकनीकी व्यवस्था की औकात से कोसों दूर नजर आता है।
तकनीकी शाखाओं पर अयोग्य कर्मचारियों को बिठाकर करोड़ों के सार्वजनिक धन और शहर के बुनियादी ढांचे के साथ सीधे तौर पर खिलवाड़ किया जा रहा है।




