
द सीक्रेट वाउचर सिंडिकेट: 3 साल, 0 टेंडर और प्रारूप 72 की वो खामोशी… बालोद पालिका का वो राज़, जिससे दहल उठा मंत्रालय
रात के सन्नाटे में नगरपालिका परिषद बालोद की बंद अलमारियों के पीछे एक ऐसा खेल खेला जा रहा था, जिसकी भनक आम जनता को कानों-कान नहीं थी।
बाहर शहर सो रहा था, लेकिन दफ्तर के बंद कमरों में सरकारी फाइलों पर नियमों का कत्ल खुलेआम हो रहा था। यह कोई साधारण कहानी नहीं है—
यह दास्तान है तीन साल से चल रहे एक अदृश्य सिंडिकेट की, जहां कागजों से टेंडर गायब थे, वर्क ऑर्डर की लाश बिछी थी और खजाने से लाखों रुपये बिना किसी आहट के ई-पेमेंट के जरिए एक ही खाते में सरकाए जा रहे थे।
जब किसी अपराध को छिपाना होता है, तो उसे टुकड़ों में अंजाम दिया जाता है। इस सिंडिकेट का सबसे बड़ा हथियार बना—प्रारूप-72 (आकस्मिक देयक)


