बालोदलोकल न्यूज़

क्या मनोनीत एल्डरमैनों के नाम से ही निकाय प्रशासन की नींद हराम है? आखिर किस बात का है खौफ!

 

​बालोद। 09 जुलाई को शपथ ग्रहण हुए हफ़्ते भर से ज्यादा का समय बीत चुका है, लेकिन नगर पालिका प्रशासन के माथे पर छाई चिंता की लकीरें साफ गवाही दे रही हैं कि भीतर ही भीतर कुछ तो गड़बड़ है।

आधिकारिक डिजिटल ग्रुप (नगर पालिका वार्ड समस्याएं) में एल्डरमैनों को शामिल न करने का मामला अब महज एक प्रशासनिक ‘लापरवाही’ नहीं, बल्कि एक गहरी ‘साजिश और खौफ’ की तरफ इशारा कर रहा है।

गलियारों में अब यह सवाल तेजी से गूंज रहा है—क्या नए एल्डरमैनों के नाम और उनकी सक्रियता से निकाय प्रशासन की नींद हराम हो चुकी है? जानकारों की मानें तो प्रशासनिक अधिकारियों और बाबुओं की इस हिचकिचाहट के पीछे एक बड़ा डर छिपा हो सकता है।

नगर पालिका में जिस तरह से तकनीकी स्वीकृतियों, टेंडरों और निर्माण कार्यों में ‘भीतर का खेल’ चलता है, उसमें नए और जागरूक जनप्रतिनिधियों का आना अधिकारियों को हजम नहीं हो रहा है।

अब देखना यह होगा कि अपनी नींद टूटने के डर से सहमा निकाय प्रशासन कब तक इन मनोनीत पार्षदों का सामना करने से बचता है।

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