
यह प्राक्कलन आपको सादर समर्पित है—
जरा कागजों के इस खेल को गौर से देखिए, फाइलों की परतों को उलटिए और अपनी अंतरात्मा से पूछिए कि नगर पालिका का यह प्रशासनिक तंत्र आखिर किसके लिए काम कर रहा है?
क्या जनता के गाढ़े पसीने की कमाई और टैक्स के पैसों से शहर का वास्तविक विकास गढ़ा जा रहा है, या फिर फाइलों में सुनियोजित लीपापोती करके अपने खास चहेतों की तिजोरियां भरने और उन्हें रातों-रात लखपति-करोड़पति बनाने की पृष्ठभूमि तैयार की जा रही है।
सड़क पर तड़पती, दुर्घटनाओं का शिकार होती बेसहारा गौमाता के नाम पर संवेदनाएं बटोरना और मंचों से बड़ी-बड़ी बातें करना बेहद आसान है, लेकिन उसी गौसेवा की आड़ में जब प्रशासनिक कलम भ्रष्टाचार की पटकथा लिखने लगे, तो लोकतंत्र का सिर शर्म से झुक जाता है।
सेवा के पावन संकल्प को किस तरह बंदरबांट का औजार बना दिया गया, इसका नग्न और निर्लज्ज सच इस एक काऊ केचर के प्राक्कलन की फाइलों में काले अक्षरों से दर्ज है।
यह सिर्फ एक गाड़ी का प्राक्कलन नहीं, बल्कि निर्वाचित परिषद की स्वायत्तता और जनविश्वास पर किया गया सीधा कुठाराघात है। अब आपको तय करना होगा कि वे इस प्रशासनिक खेल में मूकदर्शक बनकर भागीदारी निभाएंगे या फिर जनता के हक में खड़े होकर इस खुली लूट का पुरजोर विरोध करेंगे।



