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एमपी में 392 भ्रष्ट अफसरों पर गाज, लेकिन छत्तीसगढ़ के बालोद में सन्नाटा: 4,500 का घरेलू वॉटर फिल्टर अस्पताल का बताकर 40,000 में खपाया, 48 घंटे में बिल पास

एमपी में 392 भ्रष्ट अफसरों पर गाज, लेकिन छत्तीसगढ़ के बालोद में सन्नाटा: 4,500 का घरेलू वॉटर फिल्टर अस्पताल का बताकर 40,000 में खपाया, 48 घंटे में बिल पास

बालोद पड़ोसी राज्य मध्य प्रदेश में जब नगरीय प्रशासन विभाग के अपर मुख्य सचिव संजय दुबे ने जेम पोर्टल के जरिए हुई सरकारी खरीदी में 250 करोड़ की हेराफेरी पकड़ी, तो 135 सीएमओ सहित 392 भ्रष्ट अधिकारियों पर ताबड़तोड़ एक्शन हुआ, 7 बर्खास्त हुए और लोकायुक्त जांच शुरू हो गई। लेकिन छत्तीसगढ़ के बालोद नगर पालिका में जेम पोर्टल पर हुए खुलेआम फर्जीवाड़े के पुख्ता सबूत मिलने के बावजूद प्रशासन गहरी नींद में सोया हुआ है। शिकायत के दस्तावेजी सबूत यह साफ चीख-चीखकर कह रहे हैं कि यहां सरकारी खजाने को लूटने के लिए नियमों की किस तरह धज्जियां उड़ाई गईं।

4,500 का साधारण घरेलू प्यूरीफायर बना दिया अस्पताल का डायलिसिस प्लांट:

अस्पताल में मरीजों के लिए 125 एलपीएच क्षमता वाले विशिष्ट हेमोडायलिसिस पोर्टेबल आरओ प्लांट की खरीदी 40,000 प्रति नग की दर से दर्ज की गई। जब डिब्बे खुले, तो भीतर से अस्पताल का उपकरण नहीं, बल्कि किचन में लगने वाला 10 लीटर का साधारण ब्राइट एक्वा घरेलू वॉटर फिल्टर निकला। जिस फिल्टर की खुले बाजार में कीमत महज 4,500 से 6,000 रुपये है, उसे 40 हजार रुपये प्रति नग में खपाकर 2,40,000 का वारा-न्यारा कर दिया गया।

49,800 की एमआरपी वाले कूलर का बिल 80,000 में:

अनुबंध 150 एलपीएच क्षमता वाले सोलर पावर्ड वॉटर कूलर (80,000 प्रति नग) का था। सप्लाई दी गई महज 60 एलपीएच क्षमता वाले सामान्य बिजली के कूलर की। ताज्जुब की बात यह है कि कूलर के बक्से पर अधिकतम खुदरा मूल्य ही 49,800 मुद्रित था, लेकिन अधिकारियों से मिलीभगत कर 80,000 की दर से बिल पास कराकर 4,80,000 का आहरण कर लिया गया।

48 घंटे के भीतर सांठगांठ और एक्सप्रेस पेमेंट:

27 मई 2025 को जेम पोर्टल पर संविदा आदेश जारी हुआ। 28 मई 2025 को सप्लायर फर्म मेसर्स आयरा एंटरप्राइजेज द्वारा इनवॉइस कटी। 29 मई 2025 को बिना किसी तकनीकी लैब जांच, भौतिक सत्यापन या इंस्टॉलेशन रिपोर्ट के दोनों फर्जी बिल पास कर दिए गए। यही नहीं, कूलर और मेडिकल आरओ दोनों अलग-अलग श्रेणियों की सामग्री होने के बावजूद स्टॉक पंजी के एक ही पन्ने (पेज क्र. 64) पर कागजी खानापूर्ति कर ली गई।

जब नगर पालिका में यह हाल, तो अन्य विभागों में क्या हुआ होगा?

​नगर पालिका परिषद बालोद में जिस बेखौफ अंदाज में अमानक और क्षमता से बेहद कम सामग्री देकर, डिब्बे पर छपी एमआरपी से लगभग दोगुनी दर पर 24 से 48 घंटे में बिल पास करा लिए गए, उसने प्रशासनिक महकमे की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जानकारों का कहना है कि जब एक नगर पालिका में खुली आंखों से दिखने वाला गबन बिना किसी तकनीकी और भौतिक सत्यापन के पास हो गया, तो बाकी विभागों में टेंडरों और बिलों के भीतर क्या खेल हुआ होगा, इसका अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है। आशंका जताई जा रही है कि जिले बाकी विभागों में भी अमानक सामग्री थमाकर करोड़ों रुपये के सरकारी राजस्व का गबन किया गया है।

3 वर्षों के सभी टेंडरों और भुगतानों की फॉरेंसिक व तकनीकी ऑडिट की मांग:

इस संगठित गड़बड़ी को देखते हुए जनप्रतिनिधियों ने प्रशासन से मांग की है कि मामले को केवल एक-दो बिलों तक सीमित न रखा जाए, बल्कि इसकी तह तक जाया जाए। तकनीकी और प्रशासनिक विशेषज्ञों की एक स्वतंत्र टीम बनाकर पिछले 3 वर्षों में मेसर्स आयरा एंटरप्राइजेज द्वारा जिले के सभी विभागों में की गई सप्लाइयों की भौतिक जांच कराई जाए। कंपनी और उसके प्रोपराइटर को वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय से जेम पोर्टल से स्थायी रूप से डिबार करने और जिले के सभी सरकारी कार्यों से तत्काल ब्लैकलिस्ट करने की कार्रवाई हो।

पार्षदों ने कलेक्टर को सौंपी शिकायत, पर कार्रवाई सिफर:

नगर पालिका परिषद बालोद के पार्षदो गोकुल ठाकुर, दीपक लोढा और एल्डरमैन नितेश वर्मा ने प्रमाणित छायाचित्रों और बिलों के साथ कलेक्टर एवं जिला दंडाधिकारी को ज्ञापन सौंपा। शिकायत की प्रति प्रमुख सचिव, संभागीय आयुक्त, संचालक नगरीय प्रशासन और ईओडब्ल्यू को भी भेजी गई। शिकायत में भारतीय न्याय संहिता की धाराओं और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत एफआईआर दर्ज करने, फर्म को ब्लैकलिस्ट करने, राशि की भू-राजस्व बकाया की तरह वसूली करने और पिछले 3 वर्षों की सभी सप्लाइयों की विशेष ऑडिट कराने की मांग की गई है।

बड़ा सवाल:

जब मध्य प्रदेश में एआई और डेटा विश्लेषण के जरिए भ्रष्ट अफसरों के नेटवर्क को ध्वस्त किया जा रहा है, तो छत्तीसगढ़ का नगरीय प्रशासन विभाग बालोद के इस खुले फर्जीवाड़े पर आंखे क्यों मूंदे बैठा है? क्या जिम्मेदारों को बचाने के लिए फाइलें दबाई जा रही हैं, या फिर शासन निष्पक्ष जांच बैठाकर भ्रष्टाचारियों को सलाखों के पीछे भेजेगा?

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