
लिखित मांग के बाद भी एजेंडा नदारद, सिर्फ विषय-सूची के भरोसे सामान्य सभा की बैठक
BALOD नगर पालिका परिषद में अधिकारियों का रवैया देखकर लगता है मानो यहां कोई नियम-कानून नहीं, बल्कि किसी ‘दिमागी हिटलर’ का हुक्मनामा चल रहा हो।
बैठक से पूर्व पार्षद और मनोनीत पार्षद द्वारा लिखित में मांग की गई कि सदन में रखे जाने वाले प्रस्तावों का विस्तृत एजेंडा, प्राक्कलन और संबंधित नस्तियां नियमानुसार उपलब्ध कराई जाएं।
लेकिन, आलम यह है कि लिखित मांग के बावजूद सदस्यों को एजेंडा नहीं दिया गया। हाथ में सिर्फ एक पन्ने की अधूरी विषय-सूची थमा दी गई है, जिसके पीछे के असली तथ्य और वित्तीय खेल पूरी तरह छुपा लिए गए हैं।
भले ही अफसरों ने विस्तृत फाइलें छुपा ली हों, लेकिन वे यह न भूलें कि सुशासन सरकार में प्रशासनिक हठधर्मिता और भ्रष्टाचार पर पर्दा डालने की कोई गुंजाइश नहीं है।
चाहे 1.13 करोड़ का डीएमएफ स्ट्रीट पोल प्रोजेक्ट हो, पुरानी नपा इमारत के आबंटन का मामला हो, प्लेसमेंट एजेंसी के बैकडेटेड भुगतान की कार्योत्तर स्वीकृति हो या भवन विकास शुल्क के नाम पर जनता पर बोझ लादने का खेल—हर एक बिंदु पर सदन के पर सवाल जवाब होगा।



