
सुशासन में संवाद की जगह खाकी का रौब?
नगर पालिका कार्यालय में निकाय की दुकानों को सील कराने के लिए बाकायदा पुलिस बल बुलवा लिया गया। हैरान करने वाली बात यह है कि इस पूरी पुलिसिया कार्रवाई की भनक परिषद के सदस्यों को नहीं लगने दी।
क्या नगर पालिका का प्रशासनिक अमला मनमानी पर उतर आया है? क्या सुशासन और संवेदनशील सरकार की छवि को धूमिल करने के लिए जानबूझकर यह साजिश रची गई?
राज्य में वर्तमान सरकार लगातार संवाद, संवेदनशीलता और सुशासन की बात करती है, जहां नागरिकों और छोटे व्यापारियों की समस्याओं को प्राथमिकता से हल करने के निर्देश हैं।
इसके विपरीत, नगर पालिका प्रशासन ने बकायेदार दुकानदारों के साथ किसी भी स्तर पर लोकतांत्रिक संवाद स्थापित करने के बजाय पुलिस बल बुलाकर भय का माहौल बना दिया।
जिस ट्रिपल इंजन की सरकार में विकास और विश्वास की नीति चलनी चाहिए, वहां स्थानीय अफसरों ने पुलिसिया डंडे के दम पर कार्रवाई कर सरकार की मंशा पर ही सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं।
ट्रिपल इंजन की सरकार आम जनता और व्यापारियों के साथ खड़ी है, लेकिन निकाय के अधिकारी मनमानी और पुलिसिया रौब दिखाकर सुशासन के संकल्प को बदनाम करने पर तुले है।




