
सरकारी फाइलों के अंधेरे में रचा गया 8.40 लाख का मास्टरमाइंड खेल: जब खुद के छोड़े सबूत ही बन गए गले की फांस
कलेक्ट्रेट की चौखट तक पहुंचे उस सीलबंद लिफाफे में सब कुछ सामान्य दिख रहा था। पत्र क्रमांक 2861 पर तारीख दर्ज थी—06 नवंबर 2025।
विषय बेहद नेक चुना गया था— सड़क पर घूमते निराश्रित गोवंश को सुरक्षित गौधाम पहुंचाने हेतु काऊ कैचर ट्रेलर का क्रय। मांग रखी गई थी पूरे 8,40,000 की।
कलेक्ट्रोरेट की टेबल पर बैठी डीएमएफटी शाखा को भरोसा दिलाया गया कि यह दर पूरी तरह तकनीकी और शासकीय गणना पर आधारित है।
मंजूरी की मुहर लगी, बजट पास हुआ और खेल का पहला चरण शांति से पूरा हो गया। लेकिन, साजिश रचने वाले शायद यह भूल गए थे कि सरकारी नस्तियों के बंद पन्ने कभी न कभी बोलते जरूर हैं।
पृष्ठ क्रमांक 456: वो एक प्रिंटआउट… जो खोल गया पूरा कच्चा चिट्ठा… क्लाइमेक्स अभी बाकी है… अब गेंद पालिका प्रशासन के पाले में नहीं, सीधे जांच एजेंसियों के पाले में है।


