
मई में आई थी लक्ष्मी, साहेब बोले—जल्दी क्या है, सांस तो लेने दो..बजाइये ट्रिपल इंजन सरकार का बाजा
विकास की बातें भाषणों में जितनी मीठी लगती हैं, सरकारी फाइलों में उतनी ही कड़वी और ठंडी पड़ जाती हैं—इसका जीता-जागता नमूना देखना हो, तो बालोद नगर पालिका पधारिए।
नगरीय प्रशासन ने बड़े अरमानों से 27 मई 2026 को आदेश जारी किया था कि लो भैया, 5 करोड़ की प्राविधिक स्वीकृति पकड़ो, फटाफट प्रस्ताव भेजो ताकि अंतिम मंजूरी देकर टेंडर लगाएं।
सरकार को क्या पता था कि उनका पाला बालोद के ऐसे कर्मठ कछुओं से पड़ा है, जिनकी गति के आगे समय भी नतमस्तक हो जाए। मई, जून, जुलाई, अगस्त बीत गए, लेकिन हमारे हुक्मरानों की कलम की स्याही प्रस्ताव लिखने से पहले ही सूख गई।
27 अगस्त को सामान्य सभा बैठी, चाय-नाश्ता हुआ, एजेंडा क्रमांक 3 पर गंभीर चेहरे बनाकर माथापच्ची हुई और फरमान सुनाया गया— प्रस्ताव फौरन शासन को भेजो।
लेकिन AC दफ्तर के दरोगा और साहेब का मिजाज तो देखिए! चुने हुए जनप्रतिनिधियों और सामान्य सभा के प्रस्ताव को भी ऐसे रद्दी की टोकरी के हवाले कर दिया गया, जैसे किसी शादी का बासी कार्ड हो।


