
दो दिन पहले जिस स्टेडियम में तिरंगा शान से लहरा रहा था, जहां देशभक्ति के तराने गूंज रहे थे और पालिका अधिकारी साफ़-सफ़ाई के बड़े-बड़े दावे कर रहे थे, आज वही स्टेडियम अपनी बदहाली और गंदगी पर खून के आंसू बहा रहा है।
तस्वीरों ने उस तीखी खबर पर मुहर लगा दी है, जिसमें आशंका जताई गई थी कि स्वतंत्रता दिवस के बाद स्टेडियम को फिर भूल जाएगी पालिका। यह सिर्फ़ आशंका नहीं, बल्कि एक कड़वी हकीकत बनकर सामने आई है।
सबसे ज़्यादा शर्मनाक और दुखद दृश्य वह है जहां राष्ट्रीय ध्वज फहराया गया था। ध्वज स्तंभ के ठीक नीचे, जहां फूल और मालाएं चढ़ाई गई थीं, आज वहां रॉयल रिस्पेक्ट की एक विदेशी शराब की खाली बोतल लावारिस पड़ी है।
यह राष्ट्रीय सम्मान और प्रतीक का खुला अपमान नहीं तो और क्या है? क्या 15 अगस्त के बाद ध्वज स्तंभ के आसपास की सुरक्षा और गरिमा बनाए रखना पालिका की ज़िम्मेदारी नहीं थी?
बालोद की जनता इस बार सिर्फ़ आश्वासन नहीं, बल्कि ज़मीनी तौर पर बदलाव देखना चाहती है। क्या नगर पालिका अपनी पुरानी रस्म निभाते हुए इस गंदगी को फिर से बदहाली के हवाले कर देगी, या इस बार कोई स्थायी सुधार करेगी?


