
स्वच्छता निरीक्षकों के प्रमोशन की राह खुलते ही जगी आस: क्या अब अपने मूल काम पर लौटेंगे नगर पालिका के सफाई दरोगा?
बालोद – नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग द्वारा स्वच्छता निरीक्षकों की अंतिम वरिष्ठता सूची जारी किए जाने के बाद जहां एक तरफ विभागीय पदोन्नति की प्रक्रिया तेज हो गई है, वहीं दूसरी तरफ निकायों में वर्षों से जमे सफाई दरोगाओं की कार्यशैली को लेकर चर्चाएं गरमा गई हैं।
पदोन्नति के बाद नई प्रशासनिक व्यवस्था बनने की आस के बीच अब यह बड़ा सवाल उठ खड़ा हुआ है कि क्या फील्ड से गायब होकर दफ्तरों के एसी कमरों में मौज काट रहे सफाई दरोगा अब अपने मूल काम यानी स्वच्छता प्रबंधन पर लौटेंगे?
नियम और सेवा शर्तों के मुताबिक, सफाई दरोगाओं की प्राथमिक जिम्मेदारी वार्डों में सुबह-शाम साफ-सफाई का निरीक्षण करना, डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण की निगरानी, नालियों की तलीझाड़ सफाई और कचरा निष्पादन संयंत्रों की मॉनिटरिंग करना है।
हकीकत इसके ठीक उलट है। फील्ड में पसीना बहाने वाले ये जिम्मेदार दफ्तरों के वातानुकूलित केबिनों में बैठकर निर्माण, स्टोर, टेंडर, संपत्ति शाखा और भारी-भरकम बजट वाली मलाईदार शाखाओं की फाइलें निपटाने में व्यस्त हैं।



