
नियम ताक पर, ‘सेटिंग’ हावी: बिना तकनीकी योग्यता सफाई दरोगा को निर्माण शाखा की कमान; जनता पूछ रही—किसके इशारे पर खेल?
स्वच्छता निरीक्षक के रिलीव होने से पहले ही पालिका प्रशासन को सख्त कदम उठाने होंगे। स्वच्छता निरीक्षक अभी पूरी तरह भारमुक्त होकर गए भी नहीं हैं और शहर में गंदगी का साम्राज्य पसरा हुआ है।
ऐसे में शहरवासियों के मन में यह खौफनाक सवाल कौंधने लगा है कि जब नियमित स्वच्छता निरीक्षक के रहते शहर कचरे का डंपिंग यार्ड बना हुआ है, तो उनके जाने के बाद बालोद का क्या हाल होगा?
शहर की सफाई व्यवस्था का जिम्मा जिन सफाई दरोगा के कंधों पर है, उनका फील्ड और नालियों से वर्षों पुराना संन्यास जगजाहिर है।
वे लोक निर्माण (PWD) और मलाईदार शाखाओं की फाइलों के फेर में ऐसे उलझे हैं कि उन्हें वार्डों की बदहाली देखने की फुर्सत ही नहीं है।
वर्तमान में स्वच्छता निरीक्षक की मौजूदगी के बावजूद जब सफाई दरोगा अपनी मूल ड्यूटी पर नहीं लौटे, तो निरीक्षक के जाने के बाद पूरी व्यवस्था का अनाथ होना तय माना जा रहा है।




