
शहर संवारने वाली नगर पालिका खुद बनी गैराज: जब दफ्तर के भीतर ही पार्क हो गई हुक्मरान की गाड़ी
नियम जनता के लिए, कर्मचारी के लिए नो-पार्किंग भी पार्किंग
बालोद। जो नगर पालिका पूरे शहर में नो-पार्किंग, अतिक्रमण और अव्यवस्था पर चालान काटने का दम भरती है, उसी के अपने दफ्तर का यह हाल है। नगर पालिका परिसर के भीतर बरामदे और कमरों के ठीक सामने खड़ी इलेक्ट्रिक स्कूटी (CG 24 Y 6902) इस बात की गवाही दे रही है कि शहर में कानून का डंडा चलाने वालों के अपने घर में कायदे-कानून किस कदर ताक पर रखे हैं।
स्वास्थ्य शाखा के सामने व्यवस्था बीमार:
जिस गलियारे में आम जनता काम कराने के लिए कतारों में खड़ी होती है, उसी गलियारे में स्वास्थ्य शाखा के बोर्ड के ठीक सामने यह दोपहिया शान से विश्राम फरमा रही है। कूलर के बगल में और कमरों के मुहाने पर इस तरह वाहन पार्क कर देना यह दर्शाता है कि साहब को दो कदम पैदल चलकर अपनी कुर्सी तक जाने में भी शायद भारी मशक्कत लगती है।
शहर से अतिक्रमण हटाने वाले, खुद के गलियारे में बेपरवाह:
नगर पालिका के जिम्मेदार अफसर शहर की सड़कों से गाड़ियां उठवाने और फुटपाथ खाली कराने की नसीहतें देते नहीं थकते, लेकिन जब खुद के दफ्तर के गलियारे को ही निजी पार्किंग स्थल बना लिया जाए, तो सवाल उठना लाजिमी है। अब सवाल यही है कि शहर को स्वच्छता और अनुशासन का पाठ पढ़ाने वाली नगर पालिका, अपने ही गलियारे में खड़ी इस वीआईपी मनमानी पर कोई चालान काटेगी या फिर अपने ही सिक्के को खोटा मानकर आंखें मूंद ली जाएंगी?



