
बिना वर्क ऑर्डर कैसे बंटे लाखों? अब कार्योत्तर स्वीकृति के सहारे अधिकारियों की ढाल बनेगी सामान्य सभा?
सामान्य सभा की बैठक दिनांक 27.08.2026 विषय क्रमांक 6 कार्योत्तर स्वीकृति का प्रस्ताव आते ही एक और बड़ा प्रशासनिक सच उजागर हो गया है।
सामान्य सभा ने संकल्प पारित कर वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए समय रहते नई निविदा आमंत्रित करने का आदेश दिया। परिषद के संकल्प के बावजूद टेंडर प्रक्रिया महीनों तक ठंडे बस्ते में रखी गई।
जिस संकल्प की अवहेलना कर अधिकारियों ने गैर-कानूनी भुगतान बांटे, अब सामान्य सभा से कार्योत्तर स्वीकृति मांगकर पूरे मामले पर पर्दा डालने की तैयारी है।
नियम एवं वित्तीय संहिता के अनुसार, किसी भी कार्य के संपादन और शासकीय धन के आहरण से पूर्व सक्षम प्राधिकारी का वित्तीय व प्रशासनिक अनुमोदन अनिवार्य है।
कार्य पूर्ण होने और राशि अंतरित होने के महीनों बाद कार्योत्तर स्वीकृति मांगना यह स्वतः प्रमाणित करता है कि आहरण के समय वह भुगतान अनाधिकृत था।
बिना वित्तीय जांच और ऑडिट के प्रस्ताव पारित हो जाये तो भविष्य में होने वाली रिकवरी या कानूनी कार्रवाई की जिम्मेदारी कौन लेगा?




